सोशल मीडिया के सहारे अफवाहों की राजनीति

Fake News Politics
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव समाज व राजनीतिक व्यवस्था को अराजकता की ओर घसीट रहा है। अभी देश में तीन ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिनमें यह प्रतीत हो रहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाकर देश को अराजकता की आग में झोंका जा रहा है। पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक अज्ञात छात्रा के साथ रेप और उसकी हत्या की अफवाह सोशल मीडिया के माध्यम से इस तेजी से फैली कि विश्वविद्यालय परिसर का वातावरण हिंसा की आग में झुलस गया। किसी ने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि बताई जा रही घटना सत्य है या फिर झूठी। इससे पूर्व आईआईटी मुंबई में एक छात्र द्वारा आत्महत्या कर लेने के मामले में भी सोशल मीडिया में अफवाहों का बाजार गर्म रहा और जब तक एक प्रोफेसर का इस्तीफा नहीं हो गया तब तक छात्रों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। हालाँकि अब आईआईटी मुंबई ने समस्त घटनाक्रम की जांच के लिए एक 10 सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है।

उज्जैन में शाही मस्जिद प्रकरण में भी एआई के माध्यम से बनाए गए वीडियो प्रसारित करके दंगा फैला दिया गया, जबकि उज्जैन की शाही मस्जिद के अवैध हिस्से को ध्वस्त करने के लिए सरकार व शहर काजी के साथ समझौता हो चुका था। उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ के भव्य आयोजन के लिए सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, जिसकी सीमा में आने वाले 20 मंदिरों व 10 मस्जिदों को पहले ही हटाया जा चुका है उसके बावजूद कुछ अराजकतावादी कट्टरपंथी तत्वों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर पुलिसबलों पर पत्थरबाजी करके हिंसा फैला दी।

आश्चर्यजनक रूप से उज्जैन में कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी विरोध प्रदर्शन में पहुंचे। पुलिस प्रशासन ने अपनी सतर्कता से स्थिति पर जल्द ही काबू पा लिया। अभी तक की जांच के आधार पर पता चला है कि 500 सोशल मीडिया एकाउंट्स के माध्यम से अफवाहें फैलाई गयीं और लोगों को हिंसा के लिए एकत्र किया गया। उज्जैन में सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया के माध्यम से मुस्लिम समाज की भावनाओं को भड़काया गया और फिर उसमें जिस प्रकार से एआईएमआईएम की एंट्री हुई, वह अत्यंत चिंताजनक है।

पंजाब की घटना

पंजाब के दो विश्वविद्यालय भी सोशल मीडिया की अफवाहों के कारण अशांत हो गए। पंजाब की चितकारा युनिवर्सिटी और लवली प्रोफेशनल युनिवर्सिटी में फैली हिंसा की वजह वाट्सएप के माध्यम से शेयर होने वाली अफवाहें थीं। अफवाहों के कारण छात्रों में आक्रोश व्याप्त हो गया, किंतु न तो वास्तविक पीड़िता ही सामने आई और न ही उसके परिवार ने पुलिस प्रशासन से कोई मदद मांगी। बस छात्र समुदाय वाट्सएप फारवर्ड करता रहा और इंस्टाग्राम रील्स को लाइक्स और शेयर करता रहा।

इसे भी पढ़ें: आराधना मिश्रा ‘मोना’ के हाथ यूपी कांग्रेस की कमान

दोनों युनिवर्सिटी में कहीं पर भी हिंसक छात्र समुदाय ने घटनाओं की वास्तविकता जानने का प्रयास नहीं किया। जब पीड़िता अगले दिन कक्षा में उपस्थित हो गई तब उसे भूत भी कहा गया। परिणामतः विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं स्थगित हो गयीं तथा विश्वविद्यालयों को दस दिन के लिए बंद कर दिया गया। अब जब पुलिस की कार्यवाही चल रही है तब कहा जा रहा है कि दोनों ही विश्वविद्यालयों में हिंसा व आगजनी के लिए बाहर से अराजक तत्व आ गये थे।

सोशल मीडिया के माध्यम से फ़ैल रही अफवाहें देश के सामाजिक और राजनीतिक वातावरण को बिगाड़ रही हैं। उज्जैन की घटना को लेकर मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाले सभी दल भारतीय जनता पार्टी को बदनाम करने के लिए मैदान में उतर पड़े। वहीं दूसरी ओर पंजाब विश्वविद्यालय में घट रही घटनाओं पर उस कॉकरोच जनता पार्टी ने मौन साध लिया जो छात्रों की हर बात पर प्रतिक्रिया देती है। छात्रों की गूंज अभियान चलाने वाले राहुल गांधी को पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों की गूंज व आक्रोश नहीं दिखलाई दी क्योंकि वहां इंडी गठबंधन की आम आदमी पार्टी की सरकार है।

आज यह समय की आवश्यकता है कि सोशल मीडिया का सही ढंग से उपयोग किया जाए ताकि अफवाहों और अराजकता के वातावरण से बचा जा सके। आज देशभर में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को लेकर स्पष्ट चिंता दिखाई दे रही है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

इसे भी पढ़ें: राज्यसभा में 12 वर्षों में 8 गुना बढ़े अरबपति, हर 7वां सांसद 100 करोड़ क्लब में शामिल

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NEWS CHUSKI के Facebook पेज को Like व Twitter व Instagram पर Follow करना न भूलें...