अयोध्या राम मंदिर में CEO की नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी, श्रीरामभक्त होना अनिवार्य

Ram Mandir CEO Recruitment

Ram Mandir CEO Recruitment: अयोध्या के भव्य राम मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और जवाबदेह बनाने के लिए एक ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सोमवार को राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद के लिए आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी गई है। यह नियुक्ति शुरुआती तौर पर 3 वर्षों के लिए की जाएगी, जिसे परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

हाल ही में दान राशि में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद, 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में इस बड़े प्रशासनिक बदलाव पर मुहर लगाई गई थी। सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक तीन सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया गया है, जो प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी कर अंतिम फैसला लेगी।

हिंदी-अंग्रेजी का ज्ञान और 20 साल का तजुर्बा जरूरी

योग्यता और शर्तें: ट्रस्ट द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा निम्नलिखित मुख्य शर्तें तय की गई हैं।

अनिवार्य योग्यता: आवेदक का हिंदू होना और श्रीरामभक्त वैष्णव होना सबसे पहली और अनिवार्य योग्यता है। साथ ही उम्मीदवार का स्नातक (Graduate) होना और उसे हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं का अच्छा ज्ञान होना आवश्यक है।

अनुभव की शर्त: उम्मीदवार के पास किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, सरकारी विभाग, प्रतिष्ठित संस्था या कंपनी में सामान्य प्रशासन, वित्त, आईटी, सुरक्षा, विधि या जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में प्रबंधकीय कार्य (Managerial Role) का न्यूनतम 20 वर्षों का अनुभव होना चाहिए। किसी प्रसिद्ध हिंदू मंदिर के प्रबंधन का अनुभव रखने वाले या सेवानिवृत्त (Retired) अधिकारियों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।

वेतन और कार्यकाल: चयनित सीईओ को अनिवार्य रूप से अयोध्या में ही निवास करना होगा। फिलहाल वेतन तय नहीं किया गया है, जो बातचीत (Negotiation) के आधार पर निर्धारित होगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई तय की गई है।

सीईओ के मुख्य दायित्व और कॉर्पोरेट मॉडल की रूपरेखा

नया सीईओ सीधे ट्रस्ट के महामंत्री के प्रति उत्तरदायी होगा। मंदिर से जुड़े पूर्णकालिक, अंशकालिक कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के सबसे बड़े अधिकारी के रूप में सीईओ के पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। वैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों का कुशल संचालन, स्थानीय व केंद्रीय शासन के साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समन्वय, वीआईपी मेहमानों और संतों के आगमन का प्रबंधन, तथा दर्शनार्थियों की सुरक्षा व सुविधाओं को प्राथमिकता देना।

निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, सीईओ बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के ट्रस्ट के एक मजबूत सहायक के रूप में काम करेगा और उसे अपनी टीम (स्टाफ) चुनने का पूरा अधिकार होगा।

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लागू होगी पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था: राम मंदिर में अब एक सोची-समझी कॉर्पोरेट व्यवस्था लागू हो रही है। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के अनुसार, ट्रस्ट नीतिगत फैसले लेगा जबकि दैनिक संचालन का जिम्मा अनुभवी पेशेवर अधिकारी संभालेंगे।

आय-व्यय, दान और खरीद की प्रक्रियाओं का नियमित डिजिटल व स्वतंत्र ऑडिट किया जाएगा। किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले संबंधित प्रस्ताव पर उच्च अधिकारियों की लिखित मंजूरी अनिवार्य होगी, जिससे व्यक्तिगत मनमानी की गुंजाइश खत्म होगी। त्वरित संवाद के लिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल रिकॉर्ड्स की व्यवस्था की जा रही है ताकि हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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