अब भरत नगर के नाम से जाना जाएगा अयोध्या का भदरसा कस्बा, सीएम योगी का बड़ा फैसला

Ayodhya Bhadarsa Name Changed

Ayodhya Bhadarsa Name Changed: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संवारने की मुहिम के तहत एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या जिले के ऐतिहासिक कस्बे भदरसा का नाम बदलकर अब आधिकारिक तौर पर भरत नगर कर दिया है। सरकार के इस बड़े फैसले के बाद से संतों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। अपनी सनातन आस्था को मिले इस वैश्विक सम्मान से रामभक्त गदगद हैं।

दरअसल, भदरसा कस्बे का सीधा संबंध भगवान श्रीराम के अनुज भरत जी की पावन तपोभूमि नंदीग्राम (जिसे वर्तमान में भरत कुंड कहा जाता है) से माना जाता है। इसी गौरवशाली पौराणिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को आधार बनाते हुए प्रदेश सरकार ने यह नाम बदलने की घोषणा की है।

नंदीग्राम में तपस्वी जीवन जीकर भरत जी ने संभाली थी अयोध्या की बागडोर

त्रेतायुग के उस महान त्याग का गवाह यह क्षेत्र आज भी भरत जी की मर्यादा की कहानी बयां करता है। जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास पर गए थे, तब उनके छोटे भाई भरत ने अयोध्या का राजसिंहासन स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। वह श्रीराम को मनाने के लिए चित्रकूट भी गए, लेकिन जब प्रभु राम ने पितृ आज्ञा का पालन करते हुए लौटने से मना कर दिया, तब भरत जी उनकी चरण-पादुका (खड़ाऊं) सिर पर रखकर वापस लौट आए।

भरत जी ने अयोध्या के राजसी ठाट-बाट और सुख-सुविधाओं का त्याग कर नंदीग्राम में एक साधारण कुटिया बनाई। उन्होंने भगवान राम की उन्हीं खड़ाऊं को राजसिंहासन पर स्थापित किया और स्वयं चौदह वर्षों तक एक तपस्वी की भांति जीवन व्यतीत करते हुए वहीं से राज्य का संचालन किया। यही पवित्र स्थान आज भरत कुंड के नाम से विश्व विख्यात है, जिसके निकट स्थित कस्बे को अब भरत नगर का नाम दिया गया है।

भाषाई विकृतियों के कारण भरत-दशा से भदरसा बन गया था नाम

स्थानीय परंपराओं, इतिहासकारों और भाषाई विशेषज्ञों की मानें तो ‘भदरसा’ कोई मूल या प्रामाणिक नाम नहीं था, बल्कि यह समय के साथ बिगड़ा हुआ एक रूप था। रामायण काल में यह पूरा क्षेत्र भरत जी की मुख्य तपोभूमि का हिस्सा हुआ करता था। लोक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में इस स्थान को ‘भरत-दशा’, ‘भरत-वास’ या फिर ‘भरत-स्थान’ जैसे पवित्र नामों से पुकारा जाता था। लेकिन समय के चक्र और स्थानीय बोलचाल के भाषाई बदलावों के कारण ‘भरत’ शब्द का अपभ्रंश ‘भदर’ हो गया और ‘दशा’ या ‘वास’ का रूप बदलकर ‘सा’ में तब्दील हो गया। इस तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते हुए यह पावन क्षेत्र ‘भदरसा’ के रूप में सरकारी और गैर-सरकारी बोलचाल में प्रचलित हो गया था।

मध्यकाल और नवाबी शासन में ओझल हो गया था सनातन इतिहास

दस्तावेजों के मुताबिक, मध्यकाल और विशेषकर नवाबी शासन के दौर में उत्तर प्रदेश के कई प्राचीन और पौराणिक स्थानों के नाम प्रशासनिक अभिलेखों में जानबूझकर बदल दिए गए या फिर उनके मूल स्वरूप को दबा दिया गया। इसी कालखंड के दौरान ‘भदरसा’ नाम सरकारी कागजातों में दर्ज हो गया, जिसके चलते इस जगह का मूल सनातन इतिहास और भरत जी के नाम से इसका सीधा भाषाई संबंध धीरे-धीरे जनमानस की स्मृतियों से ओझल होने लगा था। इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने और इसके अद्वितीय धार्मिक व सनातन महत्व को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदरसा का नाम ‘भरत नगर’ करने का यह दूरगामी निर्णय लिया है।

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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मास्टरस्ट्रोक

योगी सरकार लगातार उन सभी प्राचीन और पौराणिक स्थलों की वास्तविक पहचान को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने के संकल्प के साथ काम कर रही है, जिनका संबंध भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से रहा है। ‘भदरसा’ को ‘भरत नगर’ का नया नाम देने के पीछे मुख्य एजेंडा इस पूरे क्षेत्र की पौराणिक और धार्मिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस पावन धरती को देखते ही भरत जी के महान त्याग, भाईचारे, समर्पण और मर्यादा की मिसाल को सीधे आत्मसात कर सकें। उत्तर प्रदेश सरकार अब इस पूरे ‘भरत नगर’ और ‘भरत कुंड’ क्षेत्र को एक बेहद भव्य और प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के खाके पर तेजी से काम कर रही है।

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