INDIA गठबंधन के 25 दलों का महामंथन, राहुल ने दी सफाई, ममता को बताया शेरनी
नई दिल्ली: केंद्र की बीजेपी सरकार से मुकाबला करने और विपक्ष की एकजुटता को धार देने के लिए सोमवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में INDIA गठबंधन की एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल बैठक हुई। इस बैठक में आगामी रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए कुल 25 विपक्षी दलों के शीर्ष नेता एक मंच पर या वर्चुअली शामिल हुए।
इस महामंथन में कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, सपा मुखिया अखिलेश यादव और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जैसे दिग्गज नेता खुद मौजूद रहे। वहीं, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बैठक में वर्चुअली जुड़े।
अखिलेश-तेजस्वी ने उठाया तालमेल का मुद्दा
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों में फूट की चल रही अटकलों के बीच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बैठक में शामिल होकर इन अफवाहों पर विराम लगा दिया। बैठक के दौरान एक दिलचस्प वाकया तब सामने आया जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए उन्हें ‘शेरनी’ कहकर संबोधित किया। वहीं, बैठक में गठबंधन के अंदरूनी तालमेल पर भी गंभीर चर्चा हुई।
अखिलेश यादव का रुख: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने गठबंधन में बेहतर समन्वय की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक में नियमित अंतराल पर बैठकें नहीं हो रही हैं, जिससे तालमेल में कमी दिखती है।
तेजस्वी यादव की चिंता: आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी अखिलेश की बात का समर्थन करते हुए कहा कि गठबंधन के दलों के बीच कम्युनिकेशन और बैठकों का एक नियमित ढांचा होना बेहद जरूरी है।
लेफ्ट की शिकायत पर राहुल गांधी की सफाई
बैठक में उस वक्त तल्खी देखने को मिली जब वामपंथी (लेफ्ट) पार्टियों ने कांग्रेस पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। लेफ्ट नेताओं ने शिकायत की कि चुनाव के दौरान हमें बीजेपी की बी-टीम बताया जाता है और यह प्रचारित किया जाता है कि हमारे नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियां (ED/CBI) इसलिए रेड नहीं मारतीं क्योंकि हम बीजेपी से मिले हुए हैं। इस गंभीर आरोप पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने खुद मोर्चा संभाला और सफाई देते हुए कहा, यह एक राष्ट्रीय गठबंधन है, लेकिन राज्य के चुनावों के दौरान कुछ चुनावी मजबूरियां होती हैं। चुनाव के वक्त राज्य के नेता जो ब्रीफिंग देते हैं, उसके आधार पर बयान देने पड़ते हैं।
मेरा किसी भी लेफ्ट के बड़े नेता से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि मेरे उनके साथ बेहद अच्छे संबंध हैं और मैं उनका सम्मान करता हूँ। इसलिए उन बयानों को सिर्फ राजनीतिक संदर्भ में ही समझा जाए, उससे ज्यादा कुछ नहीं। राहुल गांधी ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए आपस में चर्चा करके कोई नया मैकेनिज्म (तंत्र) तैयार किया जा सकता है।
DMK की वापसी और टीवीके पर चर्चा
बैठक में लेफ्ट समेत कई दलों ने DMK (द्रमुक) को दोबारा इंडिया गठबंधन में शामिल करने की जोरदार वकालत की। नेताओं का तर्क था कि चाहे देश में परिसीमन (Delimitation) का मुद्दा हो, धर्मनिरपेक्षता की बात हो या बीजेपी का पुरजोर विरोध, डीएमके ने हमेशा एक मजबूत स्टैंड लिया है। नेताओं ने चिंता जताई कि अगर डीएमके नाराज होकर वोटिंग से दूर (Abstain) रहती है और उधर टीएमसी का एक बड़ा धड़ा सरकार के पक्ष में वोट करता है, तो विपक्ष की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा, थलपति विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेट्री कड़गम) को गठबंधन में लाने पर कांग्रेस ने फिलहाल कोई सीधी चर्चा नहीं की। तय हुआ कि इन दोनों ही क्षेत्रीय दलों के मसले पर अब अलग से बातचीत की जाएगी।
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कॉकरोच जनता पार्टी पर भी हुई बात
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक में केंद्र सरकार और चुनाव प्रक्रियाओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया, बंगाल का चुनाव चोरी किया गया था। वहां पैरामिलिट्री फोर्सेस और केंद्रीय एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल हुआ और यह सिलसिला आज भी जारी है। ममता ने मांग की कि इंडिया ब्लॉक को एक प्रतिनिधिमंडल (डेलीगेशन) बंगाल भेजना चाहिए ताकि देश के सामने सच लाया जा सके। बैठक में युवाओं के बीच ट्रेंड हो रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ शब्द की भी चर्चा हुई। नेताओं ने इस पर सहमति जताई कि इस ट्रेंड पर गंभीर राजनीतिक नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यह ‘जेन जी’ (Gen Z – आज की युवा पीढ़ी) के अंदर छिपे गुस्से और असंतोष को दर्शाता है।
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