नई दिल्ली: भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने जनसंपर्क अधिकारियों को जनता और सरकार के बीच की कड़ी बताते हुए कहा है कि अब ‘गवर्नमेंट’ से ‘गवर्नेंस’ की तरफ बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को बेहतर सेवा प्रदान करना, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन करना, सूचनाओं के माध्यम से लोगों को सशक्त बनाना और शासन दक्षता में सुधार करना ही बेहतर ‘गवर्नेंस’ का उदाहरण है। प्रो. द्विवेदी सोमवार को आईआईएमसी में छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क अधिकारियों के लिए आयोजित एक सप्ताह के मीडिया एवं संचार पाठ्यक्रम के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर संस्थान के अपर महानिदेशक आशीष गोयल, पाठ्यक्रम निदेशक एवं डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार, डॉ. राकेश उपाध्याय, डॉ. पवन कौंडल एवं डॉ. मीता उज्जैन भी उपस्थित थीं।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि अगर आप एक अच्छे जनसंपर्क अधिकारी बनना चाहते हैं, तो आपको ‘अफसर’ की तरह नहीं, बल्कि एक ‘कम्युनिकेटर’ की तरह लोगों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी सूचना प्रणाली के माध्यम से यह सुनिश्चित करना आपकी जिम्मेदारी है कि सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी छोटे से छोटे गांव में रहने वाले नागरिकों तक पहुंचे।

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प्रो. द्विवेदी ने कहा कि यदि आप विभिन्न योजनाओं के बारे में लोगों को सरल और स्पष्ट भाषा में सूचित करते हैं, तो वे अपने अधिकारों और सरकारी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप सरकारी संचारक के तौर पर सफल होना चाहते हैं, तो लोगों से जुड़ें, संवाद करें और बदलाव लाएं।

आईआईएमसी के महानिदेशक के अनुसार अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज के साथ जुड़कर काम करने की आवश्यकता है। विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आपका लक्ष्य होना चाहिए। आपको ‘सरकारी’ काम को ‘असरकारी’ बनाना है।

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इस अवसर पर पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. गोविंद सिंह ने कहा कि आईआईएमसी जनसंपर्क अधिकारियों के लिए मीडिया एवं संचार से जुड़े शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग कोर्सेज का आयोजन करता है। इन पाठ्यक्रमों में लोक मीडिया से लेकर न्यू मीडिया एवं आधुनिक संचार तकनीकों की जानकारी अधिकारियों को प्रदान की जाती है। इसके अलावा न्यू मीडिया के दौर में किस तरह जनता एवं सरकार के संबंधों को बेहतर बनाया जा सकता है, इसका प्रशिक्षण भी अधिकारियों को दिया जाता है। कार्यक्रम का संचालन पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. विष्णुप्रिया पांडेय ने किया।

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