ट्विशा शर्मा मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को सीबीआई ने किया गिरफ्तार
Twisha Sharma Case: हाईप्रोफाइल ट्विशा शर्मा मामले में गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को उनके भोपाल स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया। रिटायर्ड जज पर अपनी बहू ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और कथित रूप से आत्महत्या के लिए मजबूर करने के गंभीर आरोप हैं। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत रद्द करने के एक दिन बाद की गई है।
सीबीआई टीम ने की पांच घंटे से अधिक पूछताछ
सीबीआई की टीम भारी पुलिस बल के साथ सुबह भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित गिरिबाला सिंह के घर पहुंची। कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी। जानकारी के अनुसार, सीबीआई टीम सुबह करीब 10:30 बजे उनके घर पहुंची और पांच घंटे से अधिक समय तक उनसे पूछताछ की। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। एजेंसी अब उनका मेडिकल परीक्षण कराने की तैयारी कर रही है। मौके पर मौजूद बाग सेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि गिरिबाला सिंह को गुरुवार को ही अदालत में पेश किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने अवकाशकालीन जज के आदेश पर उठाए सवाल
गौरतलब है कि घटना के दो दिन बाद गिरिबाला सिंह ने भोपाल की सत्र अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 मई को उनकी उम्र और मृतका को पैसे ट्रांसफर किए जाने का हवाला देते हुए उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। हालांकि, बुधवार को अवकाशकालीन न्यायाधीश जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने 17 पन्नों के आदेश में इस जमानत को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों और सबूतों की ठीक से जांच नहीं की थी।
आरोप सिर्फ पति तक सीमित नहीं, व्हाट्सएप चैट से मिले अहम सुराग
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि व्हाट्सएप चैट और ट्विशा के परिवार के बयानों से यह साफ होता है कि आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं। कोर्ट ने कहा, व्हाट्सएप चैट से भी यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ समर्थ सिंह के खिलाफ हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत गंभीरता से जांच की जरूरत है।

गर्भपात कराने का दबाव, शरीर पर छह से सात चोटों के निशान
परिवार का आरोप है कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे ने मिलकर ट्विशा को प्रताड़ित किया और उन पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया। अदालत ने भी माना कि यह स्वीकार किया गया तथ्य है कि ट्विशा ने गर्भपात कराया था। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी बताई गई, लेकिन हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि ट्विशा के शरीर पर छह से सात अतिरिक्त चोटों के निशान थे। इनमें बाएं हाथ, उंगली और सिर पर चोटें शामिल थीं। बाद की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ये चोटें शव को उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं।
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प्रशिक्षित न्यायिक अधिकारी ने सबूतों से की छेड़छाड़ की आशंका
ट्विशा के पिता के वकील ने अदालत में दलील दी कि गिरिबाला सिंह साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में प्रशिक्षित रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और संभव है कि उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल कर घटनास्थल के सबूतों से छेड़छाड़ की हो। फिलहाल, सीबीआई मामले की गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
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