नाइजीरिया में 30 साल का बताकर चुनाव लड़ने पहुंचा 16 साल का नेता, दस्तावेज लीक होते ही पार्टी ने किया बेदखल

Mahmood Sadiq Baba

अबुजा: राजनीति में नेताओं के चुनावी वादे, उनके भाषण और घोटाले तो अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई उम्मीदवार अपनी उम्र ही आधी छुपाकर देश का सबसे बड़ा चुनाव लड़ने पहुंच गया हो? नाइजीरिया से एक बेहद हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जहां सत्ताधारी पार्टी के एक युवा नेता ने दावा किया कि वह 30 साल के हैं, लेकिन जब उनके असली सरकारी दस्तावेज सोशल मीडिया पर लीक हुए, तो पूरी दुनिया के होश उड़ गए।

द वंडर ऑफ जारिया के नाम से मशहूर थे महमूद

यह पूरा मामला नाइजीरिया के राजनीतिक आकांक्षी महमूद सादिस बाबा का है, जिन्हें लोग प्यार से ‘अबीन अल-जाजौ’ और ‘द वंडर ऑफ जारिया’ भी कहते थे। वह नाइजीरिया की सत्तारूढ़ ऑल प्रोग्रेसिव्स कांग्रेस (एपीसी) पार्टी के सदस्य हैं। महमूद तब अचानक चर्चा में आए, जब साबोन गारी संघीय निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए उनका उम्मीदवार स्क्रीनिंग वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। इस वीडियो में वह काफी छोटे बच्चे जैसे दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनके हौसले किसी परिपक्व नेता जैसे थे।

30 साल का हूं, बौनेपन की बीमारी के कारण छोटा कद

वीडियो में जब उनसे उनकी शक्ल और उम्र को लेकर सवाल किया गया, तो महमूद सादिस बाबा ने दावा किया कि वह 30 साल के हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बच्चों जैसी शक्ल और छोटा कद ‘ड्वार्फिज्म’ (बौनेपन) की बीमारी के कारण है। स्क्रीनिंग के दौरान उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वह अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी कर चुके हैं और राजनीति में आने से पहले एक ड्राइवर के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनके इस आत्मविश्वास को देखकर जनता भी उनकी मुरीद हो गई थी।

पासपोर्ट और बर्थ सर्टिफिकेट ने खोल दी पोल

महमूद का यह सियासी सफर ज्यादा दिन नहीं चल सका। जल्द ही सोशल मीडिया पर उनके असली दस्तावेजों की तस्वीरें लीक होने लगीं। इंटरनेट पर उनके पासपोर्ट, नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (एनआईएन) स्लिप, जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल के रिकॉर्ड सामने आ गए। इन सभी दस्तावेजों के अनुसार, महमूद का जन्म साल 1995 में नहीं, बल्कि साल 2010 में हुआ था। इन दस्तावेजों के मुताबिक, उनकी असली उम्र केवल 15 या 16 साल थी, जो नाइजीरिया के राष्ट्रीय असेंबली चुनाव लड़ने के लिए तय कानूनी उम्र (25 वर्ष) से काफी कम थी।

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पहले किया बचाव, फिर अयोग्य घोषित

शुरुआत में महमूद की पार्टी एपीसी ने अपने इस स्टार कैंडिडेट का जमकर बचाव किया। पार्टी ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक दुष्प्रचार और महमूद की छवि खराब करने की साजिश बताया। लेकिन जैसे-जैसे इंटरनेट पर पुख्ता सबूत और दस्तावेज सामने आते गए, पार्टी बैकफुट पर आ गई। आखिरकार उम्र की जालसाजी साबित होने के बाद पार्टी ने महमूद को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।

भावुक पत्र लिखकर रेस से हटे महमूद

इस बड़े विवाद के बढ़ने के बाद महमूद सादिस बाबा ने आखिरकार हार मान ली। उन्होंने एपीसी के अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र लिखकर चुनावी रेस से हटने की घोषणा कर दी। अपने पत्र में महमूद ने लिखा कि पार्टी के बड़े नेताओं और हितधारकों के साथ सुलह के प्रयासों के बाद उन्होंने खुद इस रेस से पीछे हटने का फैसला किया है। इस तरह 16 साल के एक बच्चे का देश का बड़ा नेता बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन इस अनोखे ड्रामे ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया।

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