पानीपत में कलश शोभायात्रा, 350 मातृशक्ति की अटूट आस्था के बीच निकली भव्य यात्रा
पानीपत: विकास नगर (एन.एफ.एल.) क्षेत्र में आज श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ के पावन अवसर पर पूज्य स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज के सान्निध्य में एक भव्य एवं दिव्य कलश शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लगभग 350 माताओं, बहनों एवं बेटियों ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा धारण कर सिर पर मंगल कलश रखकर धर्म, संस्कृति एवं सनातन परंपरा के प्रति अपनी अटूट आस्था का अद्भुत परिचय दिया।
भक्ति-गंगा विकास नगर की धरती पर हुई प्रवाहित
भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से ओत-प्रोत यह यात्रा जब विकास नगर की गलियों से होकर गुजरी, तो सम्पूर्ण वातावरण ”राधे-राधे”, ”जय श्री हरि” एवं ”श्रीमद्भागवत महापुराण की जय” के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं वृंदावन की भक्ति-गंगा विकास नगर की धरती पर प्रवाहित हो रही हो।

जहां मातृशक्ति जागृत होती है, वहां भगवान की कृपा बरसती है
पूज्य स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज ने कहा कि जब मातृशक्ति धर्म की पताका अपने हाथों में ले लेती है, तब समाज में संस्कार, सदाचार और आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश स्वतः फैलने लगता है। कलश केवल एक पात्र नहीं, बल्कि श्रद्धा, शुद्धता, समृद्धि और दिव्य शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा, जहाँ मातृशक्ति धर्म का दायित्व संभालती है, वहाँ भगवान की कृपा, सुख, शांति और समृद्धि स्वयं आकर निवास करती है। भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को भगवान से जोड़ने का दिव्य माध्यम है।
108 कथाओं का संकल्प, जन-जन में धर्म चेतना जागृत करने का अभियान
महाराज ने अपने आध्यात्मिक संकल्प के अंतर्गत 108 श्रीमद्भागवत कथा एवं 108 श्रीराम कथा के आयोजन का पावन लक्ष्य निर्धारित किया है। यह संकल्प केवल कथा आयोजन का नहीं, बल्कि जन-जन में धर्म, संस्कार, भक्ति और राष्ट्र चेतना जागृत करने का एक दिव्य अभियान है। महाराज जी ने सभी श्रद्धालुओं से इस आयोजन में तन, मन, धन और सेवा भाव से सहयोग की अपील की।

संकल्प: सनातन संस्कृति के संरक्षण में जुटेंगे समस्त क्षेत्रवासी
इस भव्य आयोजन में माताओं एवं बहनों की अभूतपूर्व सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी समाज में अत्यंत मजबूत हैं। समस्त क्षेत्रवासियों ने संकल्प लिया कि धर्म, संस्कृति और मानव सेवा के कार्यों में सदैव अग्रणी रहेंगे तथा आने वाली पीढ़ियों को भी सनातन संस्कारों से जोड़ने का कार्य करेंगे।
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एक दीपक से हजारों दीप जलते हैं
महाराज ने कहा, एक दीपक से हजारों दीप जलते हैं, उसी प्रकार एक श्रद्धालु का सहयोग अनेक परिवारों के जीवन में भक्ति और संस्कार का प्रकाश फैला सकता है। आयोजन में आचार्य श्रीमद्भागवत मूल पाठ के लिए पंडित कृष्णधर दुबे एवं श्रीमद्भागवत कथा वाचक के रूप में पूज्या आंचल मिश्रा जी (श्री वृंदावन धाम) उपस्थित रहे। इस अवसर पर पूज्या शीला देवी माँ तथा बेटा कीर्तन मंडली का विशेष सहयोग रहा।
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