उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति

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Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करते। इसी क्रम में प्रदेश के नए डीजीपी राजीव कृष्ण ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में अपराध के प्रति जीरो टालरेंस की नीति का ही पालन किया जाएगा। प्रदेश में विगत कुछ दिनों में आपराधिक घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई जिसके परिणामस्वरुप अपराधियों का एनकाउंटर भी हुआ। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव है, इसलिए मुख्य विरोधी दल सपा के मुखिया अखिलेश यादव ऐसी किसी भी घटना को जाति या धर्म से जोड़कर भुना लेना चाहते हैं।

अखिलेश यादव के जातिगत दुराग्रह और पीडीए के नाम पर समाज को तोड़ने वाले बयानों से सतर्क होकर मुख्यमंत्री योगी ने अपराधों के इस मुद्दे को समग्र हिंदुओं की सुरक्षा के साथ जोड़ दिया दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जब भाजपा सरकार समग्र हिंदुओं की बात कर रही है तो मंडल और कमंडल सब कुछ भाजपा के ही पास रहना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मऊ में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि अब किसी माफिया या गुंडे में इतना दुस्साहस नहीं कि वह खुली जीप में पिस्तौल लहराते हुए किसी निर्दोष नागरिक को धमका सके। योगी ने कहा कि मऊ उनके लिए हमेशा विशेष रहा है। वह गोरखपुर में रहते हुए भी यहाँ आते थे। योगी ने 2005 की याद दिलाते हुए पूछा कि तब किस प्रकार मऊ को दंगे की आग में झोंकने का प्रयास किया गया था। लोग चंदा जुटाकर रामलीला, यज्ञ, नवरात्र, शिवरात्रि, जन्माष्टमी करना चाहते थे, तो उसे नहीं होने दिया जाता था।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2017 से पूर्व प्रदेश की सरकारें मफिया के आगे नतमस्तक रहती थीं। माफिया और शोहदे खुलेआम घूमते थे। बेटियां भरी दोपहरी में स्कूल-कालेज जाने में डरती थीं। यह समय स्वयं योगी आदित्यनाथ को ही को मऊ जाने से रोक दिया गया था। तब मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे माफियाओं का ही राज था।

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प्रदेश में 2017 में योगी सरकार आने तक किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इन माफियाओं का कभी सफाया हो सकता है। कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी तो जेल में रहकर ही सांसद तक बनना चाहता था और यह तो वाराणसी की जनता की समझदारी रही कि उसने मुख्तार को 17 हजार वोटों से चुनाव में हरा दिया। मुख्तार बसपा का मुस्लिम तुष्टीकरण का सबसे बड़ा चेहरा बन गया था यद्यपि एक समय वह सपा में भी रहा। आज जो लोग संविधान की किताब हाथ में लेकर घूम रहे हैं वह मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए मुख्तार व अतीक के खिलाफ नहीं बोल पाते। यह लोग तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के लिए भी काम करते थे।

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सपा-बसपा के शासनकाल में प्रदेश मे दंगों का जो वातावरण बना रहता था उसके पीछे इन्हीं अराजक तत्वों का हाथ रहता था। आज मुख्यमंत्री 2017 के पूर्व के हालातों की याद दिलाते हुए अपराधियों व उनके संरक्षाकों को भी उनका हश्र याद दिला रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी की इन बातों का प्रभाव धरातल पर दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था को लेकर एक बड़ी समीक्षा बैठक की और पुलिस अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात दोहराई।

गाजियाबाद में 17 वर्षीय हिंदू छात्र सूर्या चौहान की बकरीद के दिन धोखे से बुलाकर हत्या कर दी गयी। इस क्रूर और जघन्य घटना के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए एक आरोपी असद का एनकाउंटर कर दिया गया तथा हत्या में शामिल तीन अन्य लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन की तैयारी भी प्रारंभ कर दी है और उसके घर पर नोटिस चस्पा कर दी गई है। विगत 24 घंटे में प्रदेश मे दस मुठभेड़ हुई हैं, जिसमें एक अपराधी ढेर किया गया है और 20 गिरफ्तार किये जा चुके हैं। स्पष्ट है मुख्यमंत्री कानून का राज की केवल बात नहीं कर रहे हैं बल्कि उसे स्थापित भी कर रहे हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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