अयोध्या हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर स्वामी जितेंद्रानंद बोले- झूठ बोल रहे अविमुक्तेश्वरानंद और बृजभूषण संजय तिवारी
Hanumangarhi Namaz Controversy: अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अयोध्या के हनुमानगढ़ी परिसर में नमाज पढ़े जाने की घटना को लेकर चल रहे विवाद पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और स्वयंभू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। स्वामी जितेंद्रानंद ने साफ तौर पर कहा कि इस ऐतिहासिक घटना के पुख्ता अदालती और दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं और इसे झुठलाना सच से आंखें मूंदने जैसा है।
मामले की गहराई स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ी के महंत और श्री पंच रामानन्दीय अखाड़ा निर्वाणी के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री गौरी शंकर दास इस मामले में स्वयं वादी (केस दर्ज कराने वाले) हैं। उनके पास मौजूद अदालती दस्तावेजों के अनुसार, साल 2003 में हनुमानगढ़ी किला परिसर के पश्चिम में स्थित महंत ज्ञानदास के आश्रम में नमाज अदा की गई थी, जिसके लिए सीढ़ियों तक दरियां बिछाई गई थीं। तब मीडिया चैनलों ने भी इसे प्रमुखता से दिखाया था।
इसके बाद साल 2005 में जब दोबारा ऐसा प्रयास हुआ, तो हनुमानगढ़ी के करीब 90 फीसदी नागा साधुओं और महंतों ने इसके खिलाफ 14 दिनों तक विशाल धरना-प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन में वर्तमान मुख्यमंत्री (तत्कालीन सांसद) योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। विवाद बढ़ने पर यह मामला फैजाबाद जिला न्यायालय पहुंचा, जहां तत्कालीन न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्र के समक्ष सुनवाई हुई।
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हनुमानगढ़ी की ट्रस्ट डीड की धारा 10 का हवाला देते हुए संतों ने आपत्ति जताई थी, जिसके तहत परिसर में किसी अन्य धर्म की गतिविधियों की मनाही है। कानूनी शिकंजा कसने के बाद आरोपी महंत ज्ञानदास को अदालत में लिखित रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। कोर्ट ने उन्हें भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी देने के साथ ही साथी संतों की गद्दियों पर जाकर मौखिक क्षमा याचना का भी आदेश दिया था। स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का ब्योरा आज भी पुलिस और खुफिया विभाग (LIU) के रिकॉर्ड में दर्ज है।
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