भाजपा वरुण गांधी, स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को भेज सकती है राज्यसभा, नाम का ऐलान जल्द

UP Rajya Sabha Elections

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। सबसे बड़ा मुकाबला दसवीं सीट को लेकर देखने को मिल सकता है, जहां समाजवादी पार्टी (सपा) और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ सकते हैं। मौजूदा संख्या बल के आधार पर सपा के दो उम्मीदवारों की जीत तो तय मानी जा रही है, लेकिन पार्टी तीसरे उम्मीदवार को उतारकर इस मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है।

भाजपा की रणनीति और संभावित चेहरे

वर्तमान संख्या बल के अनुसार भाजपा अपने सात उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकती है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी आठवें उम्मीदवार को उतारने पर भी विचार कर रही है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा राष्ट्रीय महामंत्रियों स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को मैदान में उतार सकती है। इसके अलावा पार्टी जाट, राजपूत, ओबीसी और अल्पसंख्यक चेहरों पर भी दांव खेल सकती है। वर्तमान में ओबीसी सांसद गीता शाक्य और बीएल वर्मा का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिनमें से बीएल वर्मा केंद्र सरकार में मंत्री हैं, लिहाजा उन्हें दोबारा मौका मिलने की अटकलें हैं। इसके अलावा प्रकाश पाल, रेखा वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, संजीव बालियान, सत्यपाल सिंह, वरुण गांधी, सुरेश राणा, अमित मालवीय और राजबीर सिंह जैसे कई दिग्गजों के नाम भी चर्चा में बने हुए हैं।

सपा का दांव और दसवीं सीट का गणित

समाजवादी पार्टी की तरफ से एक बार फिर वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को राज्यसभा भेजने की चर्चा है। उनके साथ ही पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक रंजन और सलीम इकबाल के नामों पर भी विचार चल रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों में से वर्तमान में 396 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पहली वरीयता के कम से कम 37 वोटों की आवश्यकता होती है।

इसे भी पढ़ें: अखिलेश यादव का बड़ा चुनावी दांव, सरकार बनने पर लागू होगी पुरानी पेंशन योजना

भाजपा के पास अपने 255 विधायक हैं, जिससे वह 7 सीटें आसानी से जीत सकती है। इसके अलावा सहयोगी दलों (अपना दल एस-13, रालोद-9, सुभासपा-6, निषाद-5) का समर्थन मिलने पर सात सीटें जीतने के बाद भी 33 सरप्लस वोट बचते हैं। आठवीं सीट के लिए केवल 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है, जो जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और अन्य असंबद्ध विधायकों के समर्थन से पूरे हो सकते हैं।

समाजवादी पार्टी के पास अपने 101 और कांग्रेस के 2 विधायक मिलाकर कुल 103 वोट हैं। दो उम्मीदवारों की जीत के बाद सपा के पास 29 सरप्लस वोट बचते हैं, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे 8 और वोटों की दरकार होगी।

क्रॉस वोटिंग पर टिकी निगाहें

राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता है, यानी पार्टी के निर्देश के खिलाफ वोट करने पर भी विधायकों की सदस्यता नहीं जाती है। यही वजह है कि दोनों ही दल अधिक से अधिक विधायकों को अपने पक्ष में साधने की कोशिश में जुटे हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहा यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अपनी ताकत दिखाने का बड़ा जरिया बन गया है।

इसे भी पढ़ें: रात में प्रशासन के साथ शाही मस्जिद की 11 फीट हिस्सा हटाने की बनी थी सहमति, सुबह हो गया बवाल

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NEWS CHUSKI के Facebook पेज को Like व Twitter व Instagram पर Follow करना न भूलें...