Say No to Drugs: लखनऊ की सड़कों पर उतरा नारकोटिक्स विभाग

International Day Against Drug Abuse

Lucknow News: अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ विरोधी दिवस के विशेष अवसर पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नशे के खिलाफ एक बड़ा अभियान देखने को मिला। केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (महानगर लखनऊ) की ओर से मादक पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग और इसकी अवैध तस्करी को रोकने के लिए एक विशाल और भव्य बाइक रैली का आयोजन किया गया। इस जन-जागरूकता रैली के जरिए आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी को नशे के जानलेवा दुष्प्रभावों के प्रति सचेत रहने और एक स्वस्थ, नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया।

गौरतलब है कि यह दिवस संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित एक वैश्विक वार्षिक अभियान का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर से ड्रग्स के काले कारोबार और इसके आदी हो रहे लोगों को बचाना है।

अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

इस विशाल बाइक रैली का शुभारंभ केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के सहायक आयुक्त अनिल कुमार विश्वकर्मा ने हरी झंडी दिखाकर किया। लखनऊ के साथ-साथ ब्यूरो द्वारा इसी प्रकार के प्रभावशाली और चेतना जगाने वाले कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और बरेली जिलों में भी आयोजित किए गए, जहां स्थानीय लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

International Day Against Drug Abuse

कपूरथला से हजरतगंज तक गूंजा जागरूकता का संदेश

असिस्टेंट नारकोटिक्स कमिश्नर अनिल कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि विभाग हर साल 26 जून को इस वैश्विक अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने का काम करता है। इस वर्ष (26 जून 2026) आयोजित हुई इस रैली में विभाग के आला अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक ने बड़ी संख्या में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। रैली में मुख्य रूप से सुपरिंटेंडेंट संतोष कुमार पाठक, करुण बिलग्रामी, रोहित राज सहित ब्यूरो के तमाम अधिकारी और जांबाज कर्मचारी शामिल रहे।

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यह बाइक रैली महानगर स्थित केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के कार्यालय से शुरू हुई। इसके बाद यह काफिला कपूरथला, आईटी चौराहा, चारबाग और हजरतगंज जैसे राजधानी के प्रमुख और व्यस्ततम इलाकों से गुजरते हुए वापस कार्यालय परिसर पर आकर संपन्न हुआ।

रैली के मार्ग में जगह-जगह रुके अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहगीरों व स्थानीय दुकानदारों को मादक पदार्थों से होने वाले शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया। अधिकारियों ने दोटूक कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जब तक जनसहभागिता (पब्लिक सपोर्ट) नहीं मिलेगी, तब तक समाज को इस सामाजिक बुराई से पूरी तरह मुक्त नहीं कराया जा सकता।

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