नोएडा में वेतन की जंग में 42 हजार मजदूरों का हल्लाबोल, हिंसा के पीछे विदेशी साजिश और पाक लिंक की जांच शुरू
नोएडा: दिल्ली से सटे हाई-टेक सिटी नोएडा में पिछले दो दिनों से स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार को करीब 42 हजार फैक्ट्री कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और नोएडा के सेक्टर-63 और फेज-2 जैसे इलाके पथराव और आगजनी की चपेट में आ गए। मंगलवार को भी कई जगहों पर छिटपुट हिंसा और तनाव की खबरें मिल रही हैं।
हिंसा, आगजनी और भारी गिरफ्तारियां
सोमवार को नोएडा के 83 स्थानों पर श्रमिकों का जमावड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इनमें से दो स्थानों पर प्रदर्शन इतना उग्र हुआ कि पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों में आग लगा दी और सड़कों को जाम कर दिया, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। इस मामले में अब तक 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 100 से ज्यादा लोग हिरासत में हैं। कुल 7 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें भ्रामक खबरें फैलाने वाले दो ‘X’ (ट्विटर) हैंडल भी शामिल हैं।

क्या बाहरी तत्वों ने भड़काई आग
इस हिंसा में एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि जब शांतिपूर्ण बातचीत के बाद मजदूर लौटने लगे, तब सीमावर्ती जिलों से आए कुछ बाहरी लोगों ने भीड़ को उकसाया और हिंसा शुरू की। उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने संकेत दिया है कि हालिया आतंकी गिरफ्तारियों के मद्देनजर इसके पीछे किसी विदेशी साजिश या ‘पाकिस्तान लिंक’ की जांच की जा रही है।
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मजदूरों का दर्द, 12 घंटे काम और वेतन सिर्फ 11 हजार
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का आरोप है कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है। मजदूरों का कहना है कि हरियाणा में समान काम के लिए अधिक पैसे मिलते हैं, जबकि नोएडा में उन्हें 12 घंटे की शिफ्ट के बदले मात्र 11,000 से 15,000 रुपये दिए जा रहे हैं। कंपनियों पर आरोप है कि वे केंद्र के न्यूनतम वेतन नियमों को ताक पर रखकर डबल शिफ्ट का काम लेती हैं लेकिन भुगतान सिंगल शिफ्ट का ही करती हैं। मजदूरों की मांग है कि वेतन कम से कम 20,000 से 25,000 रुपये किया जाए।
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