Lunar Eclipse 2026: अगस्त 2026 में लगेगा 15 दिनों के भीतर दोहरे ग्रहण का महासंयोग
Lunar Eclipse 2026: भारत में खगोलीय घटनाओं को विज्ञान के साथ-साथ धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 के खाते में दर्ज कुल चार ग्रहणों में से शुरुआती दो ग्रहण पहले ही लग चुके हैं। अब साल के बाकी बचे दो अन्य ग्रहण आगामी अगस्त महीने में लगने जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों ही ग्रहण महज 15 दिनों के अंतराल पर हिंदू धर्म की दो बेहद पावन तिथियों पर लग रहे हैं, जिसे लेकर श्रद्धालुओं के बीच पूजा-पाठ को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
अगस्त में लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार (रिंग ऑफ फायर) होगा, जिसकी कुल अवधि करीब 6 घंटे की रहेगी। इसके ठीक 15 दिन बाद साल का आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। इस खगोलीय घटना के दौरान पृथ्वी की परछाई चंद्रमा के लगभग 96 फीसदी हिस्से को पूरी तरह से ढक लेगी, जिससे चांद का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही चमकदार दिखाई देगा।
12 अगस्त, 2026: हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का साया
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है (इससे पहले फरवरी में पहला सूर्य ग्रहण लगा था)। पंचांग के अनुसार, इस दिन सावन मास की अमावस्या है, जिसे लोक भाषा में ‘हरियाली अमावस्या’ कहा जाता है। इस दिन शिव आराधना और पितृ तर्पण का विशेष विधान है। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और अगले दिन यानी 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा। चूंकि यह ग्रहण पूरी तरह से रात के समय लगेगा, इसलिए भारत में यह दिखाई नहीं देगा। दृश्यमान न होने के कारण इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा, जिससे श्रद्धालु बिना किसी बाधा के हरियाली अमावस्या की पूजा कर सकेंगे।
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28 अगस्त, 2026: रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण
साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। भारतीय समयानुसार, इस आंशिक चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगी, जो दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगा। इस दिन सावन महीने की पूर्णिमा तिथि है, जिस दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। राहत की बात यह है कि यह ग्रहण दिन के वक्त लगेगा, जिससे सूर्य के तेज प्रकाश के कारण यह भारत में नजर नहीं आएगा। नतीजतन, इसका भी सूतक काल प्रभावी नहीं होगा और देश भर में बिना किसी उलझन या रुकावट के भाई-बहन राखी का पर्व पारंपरिक उल्लास के साथ मना सकेंगे।
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