चढ़ावा चोरी प्रकरण: होने लगा दूध का दूध और पानी का पानी

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के अक्षम्य अपराध पर एसआईटी की रिपोर्ट आ जाने के बाद कार्रवाई आरंभ हो चुकी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करोड़ों रामभक्तों से कहा था कि आपने राम मंदिर के लिए 500 वर्षों तक प्रतीक्षा की है, सत्यता जानने के लिए 15 दिन और प्रतीक्षा कर लें। मुख्यमंत्री जैसा कहते हैं वैसा करते हैं, रिपोर्ट आई, एफआईआर हुई और विवाद में शामिल सभी आठ आरोपी गिरफ्तार कर लिये गये। सभी आठ आरोपितों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासमत में भेज दिया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की भी चर्चा है।
अयोध्या का यह प्रकरण हिंदू समाज के लिए अत्यंत दुखद है। इस प्रकरण में जिस प्रकार विगत 35 वर्षों से अयोध्या आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले चंपत राय पर आरोप हैं वह पीड़ादायक है। चम्पत राय की निष्ठा और इमानदारी पर रंचमात्र संदेह न करने वाले भी कह रहे हैं कि अगर चंपत राय को इसकी जानकारी हो गई थी तो उन्होंने ट्रस्ट की ओर से यह बात पुलिस तक क्यो नहीं पंहुचाई? मामले पर रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज करवाई? संभवतः यही उनकी सबसे बड़ी गलती है। यदि उन्होंने स्वयं आगे आकर रिपोर्ट दर्ज करवा दी होती तो संभवतः बात इतनी आगे न बढ़ती। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मांगे जाने पर ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी जानकारी देने से मना कर दिया।
अयोध्या की इस अनहोनी से विहिप की उस छवि को गहरा आघात पहुंचा है जिसे बनाने में संगठन ने वर्षों लगाए दिये हैं। चंपत राय श्रीराम मंदिर आंदोलन से लेकर राम मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने तक जितने भी कार्यक्रम हुए उन सभी में अग्रणी भूमिका में रहे। चंपत राय अयोध्या में आने वाले हर अतिथि का स्वागत करने के लिए आगे रहते थे। चम्पत राय अपने सरल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। चंपत राय का सामाजिक जीवन एक शिक्षक के रूप में प्रारंभ हुआ था।
इंदिरा गांधी द्वारा थोपे गए आपातकाल का विरोध करने के कारण वह जेल गए थे और 8 महीने बाद बाहर आने पर संघ के प्रचारक बन गए। बाद में उनकी भूमिका विहिप में तय कर दी गई। 1984 की धर्मसंसद से उनकी भूमिका श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़ गयी तभी से वह लगातार अग्रणी भूमिका में रहे। ऐसे व्यक्ति से इतनी बड़ी चूक हो जाने से रामभक्तों का व्यथित होना स्वाभाविक है।
इस पूरे घटनाक्रम में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी किसी भी आरोपी को बचने नहीं देंगे यह तय है। यह करोड़ों करोड़ हिन्दुओं से जुड़ा विषय है यही कारण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पूरे प्रकरण को लेकर अत्यंत गंभीर हैं और दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए संकल्पवान हैं। फ़िलहाल चोरी की घटनाएँ केवल दान पेटी में डाले गए नगद धन से ही समबन्धित लग रही हैं क्योंकि चांदी की ईंटें आदि सुरक्षित पाई गई हैं।

निकल पड़े कालनेमि: अयोध्या प्रकरण सामने आने के बाद राजनीति होना स्वाभाविक ही है। अब जिन लोगों ने भगवान श्रीराम को काल्पनिक माना था, रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं और श्रीरामजन्मभूमि पर शौचालय बनवाना चाहते थे वो विकृत राजनीति को चमकाने अयोध्या आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजीरवल जो स्वयं शराब घोटाले के आरोपी हैं और कभी कहा करते थे कि मेरी नानी को तकलीफ होगी, जो वहां श्रीराम मंदिर बना अब राजनीति चमकने अयोध्या पहुंच गए हैं। तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 1990 में गोलियां चलवाकर सरयू को रामभक्तों के खून से लाल कर दिया था ऐसे रामद्रोही की पार्टी को प्रभु श्रीराम के मंदिर की चिंता हो रही है।
इसे भी पढ़ें: SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद चंपत राय मीडिया के सामने खोलेंगे राज
श्रीराम मंदिर आन्दोलन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक में बाधा डालने वाले कालनेमि कपड़े बदलकर अयोध्या पहुँच रहे हैं। रामभक्त सब कुछ देख रहे हैं और सत्य को जान रहे हैं। सत्ता के लिए अयोध्या पहुँचने वाले कालनेमि इस मुगालते में न रहें कि अयोध्या प्रकरण उन्हें यूपी में सत्ता दिला सकता है। दूध का दूध और पानी का पानी होने पर इन कालनेमियों का अयोध्या दौरा उल्टा इन्हीं पर भारी हो सकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
इसे भी पढ़ें: नई भाजपा के रोल माडल हैं योगी, हिमंत और शुभेंदु!
