Lucknow News: बड़ी भुइयन माता मंदिर में तपती धूप के बीच नागा साधु की पंचधूनी अग्नि तपस्या, गूंज रहे मंत्र

Badi Bhuiyan Mata Temple

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आईआईएम रोड, सरौरा स्थित बड़ी भुइयन माता मंदिर इन दिनों अध्यात्म और अगाध आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। अवसर है यहाँ 15 मई से शुरू हुए 21 दिवसीय भव्य श्री हनुमत महायज्ञ और तपस्वी नागा साधु आनंद गिरि महाराज की कठिन पंचधूनी अग्नि तपस्या का। माता बड़ी भुइयन मंदिर आनंद गिरि सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित हो रहे इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है।

नॉन-स्टॉप चल रहे इस आयोजन के 16वें दिन आज एक बार फिर संस्कृति, तप और साधना का अनूठा संगम देखने को मिला। दोपहर के समय जब सूर्य देव अपने पूरे शबाब पर होते हैं, तब तपस्वी नागा साधु आनंद गिरि महाराज जलते हुए उपलों (धूनी) के बीच बैठकर सूर्य देव की बेहद कठोर साधना करते हैं। उनकी इस सूर्य साधना और अग्नि तपस्या को देख लोग दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं।

Badi Bhuiyan Mata Temple

वृंदावन के आचार्यों की देखरेख में हवन

इस अनुष्ठान को पूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान के साथ संपन्न कराया जा रहा है।

मंत्रोच्चार से गुंजायमान परिसर: श्री धाम वृंदावन से विशेष रूप से पधारे आचार्य पंडित कृष्ण गोपाल अवस्थी के नेतृत्व में विद्वान पुरोहितों की टोली द्वारा सुबह से ही वैदिक मंत्रजाप किया जा रहा है। सायंकाल के समय नागा साधु आनंद गिरि के सानिध्य में मुख्य यज्ञवेदी और अन्य कुंडों में महाआरती व हवन-पूजन संपन्न होता है।

राष्ट्रवादी ब्राह्मण समाज की उपस्थिति: आज अनुष्ठान के दौरान राष्ट्रवादी ब्राह्मण समाज के जिला अध्यक्ष आशुतोष दुबे समेत शहर के कई गणमान्य लोगों और श्रद्धालुओं ने हवन कुंडों में आहुतियां डालकर पुण्य लाभ कमाया।

Badi Bhuiyan Mata Temple

मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक और माता सेवक नागा साधु आनंद गिरि महाराज ने बताया कि समाज में सद्बुद्धि, आपसी सौहार्द, सद्व्यवहार और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए इस लोक कल्याणकारी अनुष्ठान का बीड़ा उठाया गया है। यह पूरा आयोजन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री व श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि महाराज तथा थानापति महंत मुन्ना गिरि महाराज के पावन सानिध्य में संचालित हो रहा है।

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बेहद गौरवशाली है मंदिर का इतिहास

आनंद गिरि महाराज ने जानकारी दी कि आगामी 6 जून को इस 21 दिवसीय महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी, जिसके बाद एक विशाल भंडारे (महाप्रसाद) के आयोजन के साथ अनुष्ठान का समापन किया जाएगा। गौरतलब है कि सरौरा का यह मंदिर सदियों पुराना और लखनऊ की पहली धर्म ध्वजा के लिए विख्यात है। यहाँ वर्ष भर सुमेरू रूद्र महायज्ञ, शतचण्डी महायज्ञ और श्री सीताराम नाम जाप जैसे भव्य आयोजन होते रहते हैं।

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