ईरान ने भारत आ रहे जहाज को होर्मुज से किया जब्त, नई दिल्ली ने ईरानी राजदूत को किया तलब

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तेहरान/नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दो व्यापारिक जहाजों को जब्त कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक जहाज भारत के गुजरात राज्य की ओर आ रहा था। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया है।

नियम तोड़ने का आरोप और जब्ती

ईरानी सरकारी मीडिया और न्यूज एजेंसी एएफपी के अनुसार, IRGC ने एक बयान जारी कर कहा कि आज सुबह होर्मुज को पार करने की कोशिश कर रहे दो नियम तोड़ने वाले जहाजों की पहचान की गई और उन्हें रोक लिया गया। ईरान का दावा है कि इन जहाजों ने नेविगेशन सिस्टम में हेरफेर की थी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे थे। फिलहाल दोनों जहाजों को ईरानी तट की ओर ले जाया गया है।

तीन अन्य जहाजों पर गोलीबारी

जब्ती के अलावा, बुधवार को ही तीन अन्य जहाजों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं।

एपामिनोंडास: यूनानी कंपनी के इस जहाज पर ईरानी गनबोट ने गोलीबारी की, जिससे इसके ‘ब्रिज’ को काफी नुकसान पहुँचा है।

यूफोरिया: पनामा का झंडा लगे इस यूएई आधारित जहाज को निशाना बनाया गया, हालांकि इसमें कोई नुकसान नहीं हुआ।

MSC Francesca: पनामा का झंडा लगे इस जहाज के बाहरी ढांचे और रहने की जगहों पर हमले की वजह से नुकसान हुआ है।

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इससे पहले शनिवार को भी ईरानी गनबोट्स ने भारत का झंडा लगे दो जहाजों जग अर्णव और सनमार हेराल्ड पर गोलीबारी की थी। हालांकि इन घटनाओं में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। इन लगातार बढ़ते हमलों के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में ईरानी राजदूत को तलब किया। विदेश सचिव ने नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भारत की गहरी चिंता जताई। भारत ने स्पष्ट किया कि होर्मुज के रास्ते होने वाला व्यापार भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और ईरान को पहले की तरह भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग की सुविधा फिर से शुरू करनी चाहिए।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद से मध्य पूर्व (Middle East) के समुद्री रास्तों पर अस्थिरता काफी बढ़ गई है। अब तक 30 से ज्यादा जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग लेन और तेल व्यापार पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

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