lovely poem

हम भारत के हैं सपूत,
भारत हृदय हमारा है।
सुख-दुःख हैं साथ इसी के,
इसने भवित्वय संभरा है।।

इसकी संस्कृति संस्कार हमारे,
पूर्वक पूज्य हैं सभी हमारे।
इसको गौरव गरिमा हमसे,
इसके संघर्ष कर्तव्य हमारे।।

हम जाति भेद से ऊपर उठकर,
स्नेह सभी में बांटेंगे।
बाधाएं तोड़ सभी जग की,
बंधन सब मिलकर करेंगे।।

पूजा पद्धतियाँ हैं अनेक,
हम भारत सपूत बन रहें एक।
टकराव नहीं सहयोग परस्पर,
हम सब भारतीय हैं रहे टेक।।

शांति समृद्धि का मार्ग एक,
यह करके हम दिखलाएंगे।
भारत माता के चरणों में,
हम मिल शीश झुकाएंगे।।

-बृजेंद्र

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