याद सदा ही वे आते हैं
याद सदा ही वे आते हैं,
हंसते हुए कर्म के साथ।
स्मृति में संगठन तंत्र था,
सिर पे रहता उनका हाथ।।
संगठन तंत्र के दायित्व में,
निशिदिन वे रहते तल्लीन।
खोज खोज के सदा जोड़ते,
संघ मंत्र के वह थे प्रवीन।।
कई संगठन खड़े किए थे,
वे सबको पोषण दृष्टी देते।
सभी संगठन बनें प्रभावी,
सदा सभी की सुधि वे लेते।।
गौ सेवा का संकल्प लिये वे,
सिद्धि साधन में वे रहे लीन।
जुड़ा कभी भी जो भी उनसे,
रहा सदा वह ज्यों जल-मीन।।
जन्म दिवस पर वन्दन उनको,
जीवन उनका था ज्यों चन्दन।
हम भी उस पथ पर चल पाएं,
श्रृद्धा सुमन हेतु बनाएं नन्दन।।
-ब्रजेंद्र
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