यूपी में मई से बदलेंगे श्रमिकों के नियम, 8 घंटे की ड्यूटी, ओवरटाइम पर दोगुनी सैलरी

up new labour laws may 2026

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में फैक्ट्रियों, कंपनियों और होम डिलीवरी प्लेटफॉर्म (जोमैटो-स्विगी) पर काम करने वालों के लिए मई का महीना कई राहतें लेकर आ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार चार नए श्रम कानूनों को आगामी मई से पूरी तरह लागू करने जा रही है। हाल ही में नोएडा की फैक्ट्रियों में वेतन बढ़ोतरी को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद सरकार ने इस प्रक्रिया में और तेजी ला दी है। नए कानूनों के तहत काम के घंटे तय होंगे, ओवरटाइम पर दोगुना पैसा मिलेगा, और पीएफ-ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं में भी बड़े बदलाव होंगे।

15 मिनट अतिरिक्त काम पर दोगुने पैसे

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, योगी सरकार श्रम कानूनों को और सरल बनाते हुए कंपनियों में काम करने वालों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी तय कर रही है। इससे ज्यादा अगर कोई कर्मचारी 15 मिनट से अधिक समय तक काम करता है, तो उसे ओवरटाइम का दोगुना भुगतान किया जाएगा। साथ ही, नियुक्ति पत्र के साथ-साथ सैलरी पर्ची देना भी अनिवार्य होगा। यानी अब न तो कंपनियां मनमाने घंटे काम ले पाएंगी और न ही ओवरटाइम की दरों पर खेल होगा।

इनहैंड सैलरी घट सकती है, लेकिन भविष्य होगा सुरक्षित

नए कानूनों के तहत कर्मचारी के कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा मूल वेतन (बेसिक) माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब सैलरी का बड़ा हिस्सा पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस जैसी देनदारियों में जाएगा, जिससे हाथ में आने वाली तुरंत सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था श्रमिकों के भविष्य को ज्यादा सुरक्षित बनाएगी– रिटायरमेंट के बाद बड़ा फंड और बेहतर सामाजिक सुरक्षा।

चार नई संहिताओं से बदलेगी पूरी तस्वीर

राज्य सरकार ने 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समाप्त करते हुए उन्हें चार नई संहिताओं में समाहित कर दिया है– वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा एवं कार्य दशाएं संहिता 2020, और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020। इनमें सबसे बड़ा बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है। साथ ही, अब प्रबंधकीय और सुपरवाइजरी कर्मचारी भी कानूनी सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे, और ठेका श्रमिकों की जिम्मेदारी प्रमुख नियोक्ता पर तय कर दी गई है।

छंटनी से पहले री-स्किलिंग फंड

नए नियमों में छंटनी और हड़ताल को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। अगर किसी कंपनी को छंटनी करनी है, तो उसे ‘री-स्किलिंग फंड’ में 15 दिन का वेतन जमा करना होगा। साथ ही, 300 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी – पहले यह सीमा 100 थी। हड़ताल करने से पहले 14 दिन का पूर्व नोटिस अनिवार्य किया गया है। 20 से अधिक श्रमिकों वाले संस्थानों में शिकायत निवारण समिति बनाना भी जरूरी होगा।

जोमैटो-स्विगी डिलीवरी पार्टनर्स को पहली बार मिलेगी सामाजिक सुरक्षा

नई सामाजिक श्रम सुरक्षा संहिता में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (जैसे जोमैटो, स्विगी, उबर, जेप्टो के डिलीवरी पार्टनर्स) को शामिल किया गया है। अब इन कंपनियों को अपने वार्षिक कारोबार का 1-2 फीसदी हिस्सा सामाजिक सुरक्षा फंड में जमा करना होगा। एक और बड़ी राहत यह है कि कार्यस्थल आते-जाते समय हुई दुर्घटना को भी कार्य से जुड़ी माना जाएगा, यानी दुर्घटना बीमा और मुआवजे का प्रावधान।

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महिलाओं को मिलेगी रात्रि पाली में काम की अनुमति

नए वेतन संहिता के तहत हर महीने वेतन का भुगतान सात तारीख तक करना अनिवार्य होगा। समान काम के लिए समान वेतन (लिंग, जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव) पूरी तरह खत्म किया जाएगा। वहीं, महिला श्रमिकों को अब सभी शिफ्टों (रात्रि पाली सहित) में काम करने की अनुमति दी गई है, उनकी सुरक्षा के लिए उचित प्रबंध करना कंपनियों पर जिम्मेदारी होगी। केंद्र सरकार फ्लोर वेज (न्यूनतम मजदूरी की निचली सीमा) तय करेगी, जिससे नीचे कोई राज्य मजदूरी निर्धारित नहीं कर सकेगा।

नए कानूनों में निरीक्षक की भूमिका अब इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर की होगी, यानी वह सिर्फ नुकसान ढूंढ़ने नहीं आएगा, बल्कि सुधार में भी मदद करेगा। छोटे उल्लंघनों पर पहले सुधार का मौका दिया जाएगा, लेकिन गंभीर मामलों में 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। एमएसएमई सेक्टर को इन कानूनों से सबसे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उनके लिए कई प्रक्रियाएं आसान बनाई गई हैं। राज्य स्तर पर नियमों का मसौदा अधिसूचित कर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जा रही हैं, जिसके बाद मई में अंतिम नियम लागू कर दिए जाएंगे।

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