व्रत-उपवास में साधारण नमक क्यों है वर्जित? जानें सेंधा नमक का धार्मिक और ज्योतिषीय कनेक्शन

Sendha Namak Astrology

Sendha Namak Astrology: धर्म-अध्यात्म डेस्क: सनातन धर्म में व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। लेकिन अक्सर आपने देखा होगा कि हर छोटे-बड़े व्रत में साधारण (सफेद) नमक खाने की सख्त मनाही होती है और उसकी जगह केवल सेंधा नमक का ही इस्तेमाल किया जाता है। चाहे नवरात्रि हो, एकादशी, सोमवार का व्रत हो या महाशिवरात्रि—फलाहार में हमेशा सेंधा नमक को ही तरजीह दी जाती है। आखिर इसके पीछे क्या धार्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण हैं? आइए जानते हैं नेशनल डिजिटल डेस्क की इस खास रिपोर्ट में।

सेंधा नमक का किस ग्रह से है संबंध

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हम जो भी चीजें खाते हैं, उनका संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है। सेंधा नमक का सीधा संबंध चंद्रमा (Moon) और शुक्र ग्रह (Venus) से माना गया है।

चंद्रमा होगा मजबूत: चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। व्रत के दौरान सेंधा नमक का सेवन करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे मानसिक तनाव दूर होता है, मन शांत रहता है और निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) में सुधार होता है।

शुक्र देगा सुख-समृद्धि: शुक्र ग्रह को जीवन में भौतिक सुख, धन-दौलत और समृद्धि का कारक माना जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, व्रत में सेंधा नमक का उपयोग करने से शुक्र ग्रह बलवान होता है, जिससे आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

क्यों माना जाता है इसे सबसे शुद्ध और सात्विक

धार्मिक पुराणों और परंपराओं के अनुसार, व्रत का भोजन पूरी तरह से प्राकृतिक, सरल और सात्विक होना चाहिए ताकि पूजा-पाठ में मन एकाग्र रह सके।

सफेद नमक क्यों है अशुद्ध

साधारण सफेद नमक को समुद्र के पानी से तैयार किया जाता है और इसे रिफाइन करने के लिए कई तरह की केमिकल प्रक्रियाओं (Chemical Processing) से गुजरना पड़ता है। इस वजह से इसे पूजा और व्रत में शुद्ध नहीं माना जाता।

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सेंधा नमक क्यों है शुद्ध

इसके विपरीत, सेंधा नमक (Rock Salt) सीधे प्रकृति की देन है। यह पहाड़ों और चट्टानों से प्राकृतिक रूप से मिलता है। इसे साफ करने के लिए किसी केमिकल की जरूरत नहीं होती। इसलिए इसे पूरी तरह सात्विक और पुण्य फलदायी माना गया है।

जीवन में लाता है सकारात्मक ऊर्जा

सेंधा नमक को पृथ्वी तत्व से जोड़ा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह घर और शरीर के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करता है। पूजा के समय वातावरण की सात्विकता को बनाए रखने में भी यह मददगार है। इसके सेवन से चिड़चिड़ापन और बेचैनी दूर होती है, जिससे साधक का ध्यान पूरी तरह से ईश्वर की भक्ति में लगा रहता है।

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