स्वागत है डीएम साहब! ये अयोध्या है… यहां फाइल नहीं, फौलाद चाहिए

new dm shashank tripathi faces challenges in ayodhya

समीर शाही

तो आखिरकार एक और युवा अफसर की एंट्री हो गई अयोध्या के इस तपते अखाड़े में। स्वागत है शशांक त्रिपाठी जी! IIT की चमक, IAS का तमगा और सरकार का भरोसा- सब आपके साथ है। लेकिन जनाब, यहां की जमीन पर उतरते ही ये तमगे नहीं, आपकी हिम्मत और हकीकत काम आएगी।

अयोध्या कोई सामान्य जिला नहीं है। ये वो जगह है जहां आस्था सांस लेती है, राजनीति धड़कती है और प्रशासन हर दिन परीक्षा देता है। यहां एक नाला साफ कराना भी खबर बनता है और एक अतिक्रमण हटाना आंदोलन। राम मंदिर के बाद विकास की गाड़ी तो दौड़ रही है, लेकिन उसके पहिए अक्सर विवादों के कीचड़ में फंस जाते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती क्या है? सिस्टम। वही पुराना, जिद्दी और जंग लगा सिस्टम, जो अच्छे-अच्छे अफसरों की धार कुंद कर देता है। जमीन माफिया, ठेकेदारी का खेल, विभागों की सुस्ती और जनता का गुस्सा- ये सब मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह बनाते हैं, जिसमें फंसकर कई काबिल अफसर सिर्फ नाम के रह जाते हैं।

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जनता अब भाषण नहीं, बदलाव चाहती है। उसे ऐसा डीएम चाहिए जो सिर्फ कुर्सी पर बैठकर आदेश न दे, बल्कि सड़क पर उतरकर सच देखे। भ्रष्टाचार पर चोट करे, फाइलों में दबे सच को बाहर निकाले और रामनगरी को सिर्फ पोस्टर नहीं, हकीकत में चमकाए।

शशांक जी, यहां हर फैसला आपको या तो नायक बनाएगा या सवालों के कटघरे में खड़ा करेगा। ये अयोध्या है, यहां इतिहास बनता भी है और बनाया भी जाता है। अब देखना ये है कि आप इस कहानी के किरदार बनते हैं… या लेखक।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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