महालक्ष्मी के कमल पर विराजमान होने के रहस्य में छिपा है जीवन प्रबंधन का बड़ा सूत्र
Newschuski Digital Desk: सनातन धर्म में धन और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी को हमेशा खिले हुए कमल के पुष्प पर आसीन दिखाया जाता है। इसके पीछे न केवल गहरे आध्यात्मिक और धार्मिक कारण छिपे हैं, बल्कि यह दृश्य आधुनिक मानव जीवन के लिए प्रबंधन (लाइफ मैनेजमेंट) का एक अद्भुत संदेश भी देता है। अमूमन देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति के पास अत्यधिक धन आता है, तो उसका नशा और मोह-माया इंसान को पतन के रास्ते पर ले जाती है। धन के अहंकार में चूर होकर व्यक्ति अक्सर सामाजिक बुराइयों और अधर्म के जाल में फंस जाता है, जिससे उसका विनाश तय हो जाता है। ऐसे में लक्ष्मी जी का यह स्वरूप मनुष्य को सही राह दिखाता है।
कीचड़ में रहकर भी अछूता रहता है कमल
कमल के फूल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह बेहद गंदे कीचड़ में जन्म लेने के बावजूद अपनी सुंदरता, पवित्रता और खुशबू को बरकरार रखता है; गंदगी उस पर कभी हावी नहीं हो पाती। माता लक्ष्मी इसी माध्यम से यह संदेश देती हैं कि वे केवल उसी व्यक्ति के घर में स्थाई रूप से वास करती हैं, जो इस कलयुगी समाज की बुराइयों के बीच रहकर भी कमल की तरह निष्पाप और पवित्र बना रहता है।
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जिस तरह लक्ष्मी जैसी परम पूजनीय देवी को अपने ऊपर धारण करने के बाद भी कमल का फूल पूरी तरह सहज और शांत रहता है, ठीक उसी तरह धनवान व्यक्ति को भी समृद्धि पाकर अहंकारी होने के बजाय विनम्र और सरल बने रहना चाहिए, ताकि लक्ष्मी जी की कृपा उन पर हमेशा बनी रहे।
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