अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा हेरफेरी में SIT ने यूपी सरकार को सौंपी प्रारंभिक गोपनीय रिपोर्ट, 60 से अधिक लोगों से हुई पूछताछ

SIT Preliminary Report

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गबन व अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी पहली प्रोग्रेस रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है। एसआईटी की ओर से यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद को आधिकारिक तौर पर सौंप दी गई है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में पड़ताल अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है; जांच की विधिक कार्यवाही लगातार आगे बढ़ रही है और विस्तृत अंतिम रिपोर्ट (Final Report) बाद में पेश की जाएगी।

गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेरफेरी और चोरी की शिकायतें सामने आने के बाद देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर तुरंत कड़ा संज्ञान लिया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक मांग और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय एसआईटी का गठन किया था। इस जांच दल का जिम्मा बेहद निष्पक्षता के साथ पूरे प्रकरण की तह तक जाकर सच को शासन के सामने लाने का है।

SIT ने खंगाले दस्तावेज, 5 दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ

लखनऊ मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित इस विशेष टीम ने अयोध्या धाम में लगातार छह दिनों तक कैंप किया। इस दौरान टीम ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली, दानपात्रों के रखरखाव और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े विभिन्न संवेदनशील पहलुओं की सूक्ष्मता से जांच की। एसआईटी ने मंदिर परिसर और ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों, चढ़ावे की गिनती करने वाले स्टाफ सहित पांच दर्जन (60) से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं और उनसे गहन पूछताछ की है।

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कई अहम बिंदुओं पर अभी चल रही है तकनीकी पड़ताल

मामले की प्रगति के विषय में जानकारी देते हुए लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह एक बेहद संवेदनशील और गोपनीय जांच है। शासन को अभी केवल प्राथमिक निष्कर्षों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों से अवगत कराने के लिए शुरुआती रिपोर्ट दी गई है। उन्होंने साफ किया कि जांच का दायरा काफी बड़ा है और टीम अभी भी कई तकनीकी और वित्तीय बिंदुओं पर गहराई से पड़ताल कर रही है। इन सभी बिंदुओं पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार कर सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

इस हाई-प्रोफाइल और आस्था से जुड़े संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिए बनाई गई एसआईटी में अनुभवी अफसरों को जगह दी गई है। कमिश्नर विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाले इस पैनल में लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरन एस और उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। यह टीम न सिर्फ घोटाले की सच्चाई सामने लाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए मंदिर की सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन के संबंध में जरूरी सिफारिशें भी सरकार को सौंपेगी।

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