हेमंत सोरेन सरकार और छात्र डेलिगेशन की मैराथन बैठक शुरू, मंत्रियों के साथ 10 छात्र प्रतिनिधियों की वार्ता जारी

Jharkhand Chhatra Andolan

Jharkhand Chhatra Andolan: झारखंड की राजधानी रांची से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां उग्र आंदोलन के बीच आखिरकार हेमंत सोरेन सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच उच्चस्तरीय वार्ता का दौर शुरू हो गया है। मोहराबादी स्थित राजकीय गेस्ट हाउस में यह बेहद महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए गेस्ट हाउस परिसर और उसके आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है।

इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सोरेन सरकार की ओर से 4 दिग्गज मंत्री मोर्चा संभाल रहे हैं। इनमें ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव शामिल हैं। वहीं प्रशासनिक मोर्चे पर पूरी स्थिति को संभालने के लिए रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजू नाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन खुद बैठक में मौजूद हैं। यह वार्ता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसके नतीजों पर पूरे प्रदेश के युवाओं की नजरें टिकी हुई हैं।

विरोध और गतिरोध के बीच सिर्फ छात्रों के 10 सदस्यीय डेलिगेशन को मिली एंट्री

सरकार के साथ टेबल टॉक के लिए छात्रों की ओर से 10 प्रतिनिधियों का चयन किया गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में रविंद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल हैं। सरकार की कड़ी शर्त के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इस डेलिगेशन में सिर्फ और सिर्फ छात्र ही शामिल हैं, किसी भी पत्रकार या वकील को वार्ता का हिस्सा नहीं बनाया गया है।

अजीत कुमार के नाम पर फंसा था पेंच, छात्रों ने रणनीति बदलकर सरकार को नहीं दिया मौका

गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को दिनभर छात्र प्रतिनिधिमंडल सरकार की तरफ से बुलावा आने का इंतजार करता रहा था, लेकिन वार्ता का न्योता नहीं आया। बाद में झारखंड सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि वह सीधे सिर्फ छात्रों से संवाद करना चाहती है, जबकि शुरुआती 11 सदस्यीय डेलिगेशन में कुछ ऐसे चेहरे शामिल थे जिन पर सरकार को आपत्ति थी। मुख्य गतिरोध पूर्व महाधिवक्ता एडवोकेट अजीत कुमार के नाम पर था, जिन पर बीजेपी से जुड़े होने के दावे किए जा रहे थे।

एसडीएम के जरिए सरकार का रुख स्पष्ट होते ही छात्रों ने परिपक्वता दिखाई और आंदोलन को किसी राजनीतिक रंग में फंसने से बचाने के लिए तुरंत नई सूची तैयार कर ली। छात्रों की इस त्वरित रणनीति के कारण सरकार के पास वार्ता टालने का कोई बहाना नहीं बचा।

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आंदोलन के बीच AISA अध्यक्ष पर फेंकी गई स्याही, आरोपी पुलिस हिरासत में

छात्र आंदोलन के दौरान आज उस वक्त भारी तनाव फैल गया जब आइसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा पर अचानक एक अज्ञात शख्स ने स्याही फेंक दी। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, वहां तैनात पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्याही फेंकने वाले आरोपी को तुरंत मौके से खदेड़कर हिरासत में ले लिया। पुलिस फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि इस घटना के पीछे की मंशा क्या थी।

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