एक ही छत के नीचे रहते हैं चाना परिवार के 200 लोग, रोजाना बनता है 90 किलो चावल

Chana Family Mizoram

Newschuski Digital Desk: आज के आधुनिक दौर में जहां संयुक्त परिवार तेजी से बिखर रहे हैं और लोग छोटे परिवारों में सिमटते जा रहे हैं, वहीं भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में एक ऐसा परिवार भी है जो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बना हुआ है। मिजोरम के बक्तावंग गांव (Baktawng Village) में रहने वाला चाना परिवार (Chana Family) दुनिया के सबसे बड़े परिवारों में गिना जाता है। इस परिवार में सदस्यों की संख्या 10, 20 या 50 नहीं, बल्कि पूरे 200 है।

एक ही छत के नीचे रहने वाले इस विशाल परिवार में 39 पत्नियां, 94 बच्चे, 14 बहुएं, 33 पोते-पोतियां और कई अन्य सदस्य शामिल हैं। जहां आम घरों में 30-40 मेहमानों के आने पर व्यवस्था संभालना चुनौती बन जाता है, वहीं यह परिवार रोजाना सैकड़ों लोगों के साथ एक ही घर में रहता, खाता और अपनी जिंदगी बिताता है।

1942 में शुरू हुआ था इस असाधारण परिवार का सफर

इस परिवार की कहानी केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका अपना एक धार्मिक और सामाजिक इतिहास है। इस परंपरा की शुरुआत साल 1942 में हुई थी, जब खुआंगतुआहा (Khuangtuaha) ने लालपा कोहरान थार (Lalpa Kohhran Thar) नाम के एक धार्मिक समुदाय की नींव रखी थी। वर्ष 1997 में उनके निधन के बाद जियोना चाना (Ziona Chana) इस समुदाय के प्रमुख बने, जिन्हें स्थानीय लोग सम्मान से होटुपा (नेता) कहते थे। जियोना चाना के नेतृत्व में परिवार और समुदाय दोनों का विस्तार हुआ।

Chana Family Mizoram

100 कमरों का 4 मंजिला मकान

बक्तावंग की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच स्थित इस परिवार का चार मंजिला मकान किसी हॉस्टल या रिसॉर्ट जैसा दिखाई देता है। इस भव्य घर का नाम छुआन थार रन (Chhuan Thar Run) है, जिसमें करीब 100 कमरे बने हुए हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए इसमें अलग से गेस्ट हाउस की व्यवस्था भी है।

आज यह मकान मिजोरम के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। घर के अंदर अनुशासन और व्यवस्था का पालन किया जाता है। घर के वरिष्ठ सदस्य और बड़ी उम्र की पत्नियां ऊपरी मंजिलों पर रहती हैं, जबकि अन्य सदस्य निचली मंजिलों में रहते हैं।

रोजाना लगता है 90 किलो चावल और 40 किलो आलू का भोग

इस परिवार की रसोई किसी विशाल सामुदायिक लंगर जैसी नजर आती है। रोजाना सैकड़ों लोगों का खाना तैयार करने के लिए बड़े-बड़े एल्युमिनियम के बर्तनों और चूल्हों का इस्तेमाल किया जाता है।

चावल: 45 से 90 किलोग्राम

आलू: लगभग 40 किलोग्राम

सब्जियां: 25 किलोग्राम

दाल: 20 किलोग्राम

चिकन (नॉन-वेज): 30 से 35 मुर्गे

घर में जिम्मेदारियों का बंटवारा पूरी तरह तय है। बहुएं खाना बनाने का जिम्मा संभालती हैं, बेटियां घर की सफाई और कपड़े धोने का काम करती हैं, जबकि पुरुष खेती, पशुपालन, बढ़ईगिरी (Carpentry) और बर्तन बनाने के कुटीर उद्योगों में योगदान देते हैं।

Chana Family Mizoram

खुद का इकोसिस्टम और पूर्ण आत्मनिर्भरता

जियोना चाना का परिवार केवल बड़ा ही नहीं है, बल्कि काफी हद तक आत्मनिर्भर भी है। यह परिवार अपनी जरूरतों की फसलें खुद उगाता है और पशुपालन करता है। यहां तक कि फर्नीचर और एल्युमिनियम के बर्तन भी घर के सदस्य खुद तैयार करते हैं। बच्चों की शिक्षा के लिए जियोना चाना ने गांव में एक स्कूल की स्थापना की थी, जहां सरकारी पाठ्यक्रम के साथ-साथ समुदाय के सांस्कृतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है।

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गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को कर दिया था मना

साल 2011 में ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ (Guinness World Records) की टीम ने इस परिवार को दुनिया के सबसे बड़े परिवार के रूप में दर्ज करने के लिए सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, जियोना चाना ने अत्यधिक प्रचार-प्रसार से दूर रहने की अपनी इच्छा के कारण रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड अकादमी’, ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘लंदन वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने इसे विश्व के सबसे बड़े परिवार का दर्जा दिया।

मुखिया के निधन के बाद भी कायम है अटूट एकजुटता

13 जून 2021 को 75 वर्ष की आयु में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण जियोना चाना का निधन हो गया। हालांकि, उनके जाने के बाद भी बक्तावंग की पहाड़ियों में बना यह 100 कमरों का घर आज भी आबाद है। परिवार के सभी 200 सदस्य आज भी उसी प्यार, अनुशासन और एकजुटता के साथ एक साथ रह रहे हैं और सदियों पुरानी भारतीय संयुक्त परिवार की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।

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