भरत तिवारी एनकाउंटर पर भड़के अनिरुद्धाचार्य, बोले- निर्दोषों को मारना राजा के लिए पाप

Bharat Tiwari Encounter

वृंदावन: प्रख्यात कथावाचक बाबा अनिरुद्धाचार्य ने भरत तिवारी के पुलिस एनकाउंटर को लेकर सूबे की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में सरकारी तंत्र और अधिकारी जनता की समस्याओं पर काम नहीं करते हैं। उस लड़के (भरत तिवारी) ने अपने क्षेत्र की समस्याओं और काम को लेकर बार-बार अफसरों से गुहार लगाई थी, लेकिन जब उसकी बात नहीं सुनी गई तो मजबूरन उसे हथियार उठाने पड़े। अनिरुद्धाचार्य ने तर्क दिया कि उसने किसी की जान लेने या किसी की हत्या करने के इरादे से बंदूक नहीं उठाई थी, बल्कि वह व्यवस्था से त्रस्त था, इसके बावजूद पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया। उन्होंने चेताया कि जब जनता की बात नहीं सुनी जाएगी, तो कोई न कोई तो विरोध में खड़ा होगा ही।

निर्दोष नागरिकों की जान लेने वाली सत्ता को जनता पापी कहेगी

कथावाचक ने धार्मिक और नैतिक मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि अपनी ही जनता की हत्या करना किसी भी शासक या राजा के लिए घोर पाप की श्रेणी में आता है। ऐसी परिस्थितियों में आम जनता अपने शासक को पापी ही कहेगी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वह राजा बड़ा पापी माना जाएगा जो अपनी ही बेकसूर जनता को मौत के घाट उतरवा रहा है। भारतीय संस्कृति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अपनी शरण में आए हुए व्यक्ति पर कभी भी प्रहार नहीं करना चाहिए। अगर वह युवक कोई खूंखार अपराधी या देशद्रोही होता, तो उसे मारना न्यायसंगत था और उस पर कोई आपत्ति नहीं जताता।

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प्रशासनिक व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि पुलिस और सरकार को उन अपराधियों और आतंकवादियों का एनकाउंटर करना चाहिए जिन्होंने दर्जनों हत्याएं की हैं और जो समाज के लिए नासूर बन चुके हैं। लेकिन जो व्यक्ति सही है और अपने गांव, समाज तथा जनहित की समस्याओं के लिए आवाज बुलंद कर रहा है, उसे ही मार देना सरासर गलत है। उन्होंने वर्तमान प्रशासनिक ढांचे को ‘बहरा’ करार देते हुए कहा कि यह दमनकारी नीति काम नहीं आएगी; आज आप एक आवाज को दबाने के लिए किसी को मारेंगे, तो कल व्यवस्था के खिलाफ दूसरा व्यक्ति खड़ा हो जाएगा।

खाकी को रामचरितमानस से संस्कार देने की नसीहत

नेताओं और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि राजनेताओं को अपनी जनता से स्नेह होना चाहिए। अमूमन देखा जाता है कि चुनाव के समय वोट लेने के बाद नेता अपनी ही जनता का दमन शुरू करवा देते हैं। उन्होंने पुलिस बल के व्यवहार पर भी चिंता जताई और कहा कि हमारी पुलिस को नैतिक संस्कारों की सख्त जरूरत है। पुलिसकर्मियों को रामचरितमानस का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, जिससे वे यह समझ सकें कि अपनी शरण में आए या आत्मसमर्पण करने वाले किसी भी व्यक्ति को मारना कितना बड़ा पाप है।

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