Shrimad Bhagwat Katha: पूतना हो या तृणावर्त, प्रभु ने दुष्टों का भी किया उद्धार
की अलौकिक बाल लीलाओं का रसपान कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। महाराज ने कथा के मर्म को समझाते हुए कहा कि संसार में त्रिलोकीनाथ भगवान श्रीकृष्ण के समान कृपालु और दयालु कोई दूसरा नहीं हो सकता। इसका सबसे बड़ा प्रमाण पूतना जैसी राक्षसी है, जो प्रभु को विषपान कराकर मारने आई थी, लेकिन करुणासागर कृष्ण ने न सिर्फ उसे मां की गति दी, बल्कि उसे अपने परम धाम बैकुंठ में भी स्थान प्रदान किया।
निर्मल और निष्पाप मन को ही चुराते हैं चितचोर
कथा व्यास ने प्रभु की प्रसिद्ध माखन चोरी लीला का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि भगवान किसी के घर का दूध-दही नहीं, बल्कि भक्त के निर्मल और निष्पाप मन रूपी माखन को चुराते हैं। ब्रज की गोपियाँ पूर्णतः जानती थीं कि कन्हैया कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि साक्षात् परब्रह्म परमात्मा हैं। इसी तरह, मिट्टी खाने की लीला का रहस्य बताते हुए महाराज ने कहा कि प्रभु ब्रज की पवित्र रज (मिट्टी) को ब्रह्मांड का सार मानकर अपने हृदय में धारण करते हैं।
कथा के दौरान आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण और दाऊ भैया के नामकरण संस्कार का भी मनोहारी प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि गर्गाचार्य द्वारा बड़े भाई का नाम बलराम व संकर्षण और यशोदा नंदन का नाम श्रीकृष्ण रखा गया था।

कथा में आगे शकटासुर और तृणावर्त वध के प्रसंगों के माध्यम से भगवान की सर्वोच्च दिव्यता पर प्रकाश डाला गया। महाराज ने बताया कि जब चक्रवात रूपी राक्षस तृणावर्त आकाश में प्रभु को ले गया, तब भगवान ने अपना भार बढ़ाकर उसका अंत किया और धरती पर गिरते समय माता यशोदा को अपने मुख के भीतर संपूर्ण विश्वरूप के दर्शन कराए।
इसके बाद भगवान को ऊखल से बांधे जाने (दामोदर लीला) और यमलार्जुन उद्धार की कथा सुनाई गई। प्रभु की कृपा से कुबेर के शापित पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव वृक्ष योनि से मुक्त हुए और उन्होंने प्रभु से प्रार्थना की।
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“हे गोविंद! हमारी वाणी सदैव आपके नाम का गुणगान करे, हमारे कान आपकी अमृतमयी कथा सुनें, हमारी आँखें आपके दिव्य दर्शन करें और हमारा शीश हमेशा आपके चरणों में झुका रहे।”
कथा के अंतिम चरण में ब्रह्मा जी का मोह, कालिय नाग का मान-मर्दन, वेणु गीत की महत्ता तथा गौमाता, ब्राह्मण एवं गिरिराज गोवर्धन के पूजन का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया गया। आरती के बाद सभी श्रद्धालुओं में विशेष रूप से ‘छप्पन भोग’ का प्रसाद वितरित किया गया।
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