मरीज के साथ रुकी नाबालिग का अपहरण कर गैंगरेप, महिला समेत 3 दबोचे गए

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झारसुगुड़ा: ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यहाँ जिला मुख्यालय अस्पताल (DHH) परिसर से एक नाबालिग लड़की का कथित तौर पर अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया।

इस शर्मनाक घटना के बाद से पूरे इलाके के लोगों में भारी गुस्सा और आक्रोश है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात में शामिल एक महिला समेत तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, नाबालिग लड़की अस्पताल में भर्ती अपने एक बीमार रिश्तेदार की देखरेख के लिए बतौर अटेंडेंट वहाँ रुकी हुई थी। आरोप है कि 17 मई की रात को आरोपियों ने उसे झांसा दिया और अस्पताल परिसर से अगवा कर पास के एक सुनसान जंगल में ले गए, जहाँ उसके साथ दरिंदगी की गई। घटना की भनक लगते ही झारसुगुड़ा एयरपोर्ट थाना पुलिस तुरंत एक्शन में आई।

पुलिस ने विशेष टीमों का गठन कर तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तीन आरोपियों को धर-दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बुरोमल निवासी आकाश प्रधान और राजा बेसन के रूप में हुई है, जबकि वारदात में मदद करने के आरोप में एक महिला को भी सह-आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने सभी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।

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अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग

झारसुगुड़ा बाल कल्याण समिति (CWC) की अध्यक्ष संजुक्ता महापात्रा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने पीड़िता को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया था। समिति के सदस्यों ने बच्ची से बात की, जहाँ उसने रोते हुए अपने साथ हुई इस खौफनाक आपबीती को साझा किया। सीडब्ल्यूसी ने पीड़िता की उचित काउंसलिंग करने के बाद उसे सुरक्षित उसके परिवार को सौंप दिया है, साथ ही भविष्य में उसकी देखरेख और पुनर्वास के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे सुरक्षित और संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से भी अगर बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय जनता ने सरकार से इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और दोषियों को फांसी की सजा देने के साथ-साथ सभी सरकारी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरों और रात्रिकालीन सुरक्षा को कड़ा करने की मांग की है।

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