लखनऊ की इस मस्जिद पर पासी समाज ने ठोका दावा, बताया राजा कंस का किला
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का मलिहाबाद इलाका अब एक नए बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। पासी समाज ने मलिहाबाद के एक मुस्लिम धार्मिक स्थल (मस्जिद और मकबरे) पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोक दिया है। समाज का कहना है कि जिस जगह को वर्तमान में मस्जिद और कब्रिस्तान बताया जा रहा है, वह असल में 11वीं सदी के प्रतापी राजा कंस पासी का किला था।
इस मामले को लेकर पासी समाज के बड़े नेता सूरज पासवान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर मामले में दखल देने की मांग की है। समाज का कहना है कि यह उनकी आस्था और गौरवशाली इतिहास से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है।
अयोध्या-मथुरा की तरह कोर्ट जाएगा पासी समाज
इस पूरे मोर्चे की अगुवाई कर रहे पासी नेता सूरज पासी ने सोशल मीडिया पर आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। उनका कहना है कि राजा कंस पासी के आराध्य भगवान शिव के प्राचीन मंदिर को इस परिसर से मुक्त कराने के लिए उनके पास पुख्ता ऐतिहासिक सबूत मौजूद हैं। अयोध्या, काशी, सम्भल और मथुरा की तर्ज पर अब इस मामले को भी अदालत के दरवाजे तक ले जाया जाएगा। इसके लिए ‘लाखन आर्मी’ पूरे प्रदेश के पासी समाज और हिंदू समुदाय को एकजुट कर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही है, जिसकी घोषणा जल्द की जाएगी।
इस विवाद में अब अखिल भारत हिंदू महासभा की भी एंट्री हो गई है। संगठन के नेता शिशिर चतुर्वेदी ने तीखे तेवर अपनाते हुए इसे जमीन जिहाद का नाम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि महाराजा कंस पासी के किले पर अवैध कब्जा तुरंत रोका जाए और वहां नमाज बंद हो, अन्यथा हिंदू महासभा खुद मौके पर पहुंचकर पासी समाज की विरासत की रक्षा करेगी।
क्या है राजा कंस के किले का इतिहास
पासी समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, मलिहाबाद के ‘का मंडी’ क्षेत्र में स्थित यह ढांचा 11वीं शताब्दी का एक ऐतिहासिक दुर्ग है। इस किले के भीतर एक प्राचीन महादेव मंदिर था, जिसे बाद में बदल दिया गया। अपने दावों को मजबूत करने के लिए समाज ने लखनऊ के पुराने गजेटियर और इतिहास के पन्नों का हवाला दिया है।
गजेटियर का इतिहास: 11वीं सदी में काकोरी और मलिहाबाद का पूरा क्षेत्र राजपासी राजा कंस के अधीन था। जब विदेशी आक्रमणकारी सालार मसूद गाजी ने भारत पर हमला किया, तो राजा कंस ने उसे धूल चटाई थी और इसी क्षेत्र में गाजी के दो सेनापतियों को मार गिराया था।
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भारी सुरक्षा के बीच हुई जुमे की नमाज
इस विवाद की गूंज जमीन पर भी दिखने लगी है। पासी समाज ने इस स्थल पर नमाज रोकने का ऐलान किया था, जिसके बाद बीते शुक्रवार को इलाके में भारी तनाव देखा गया। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए पूरे इलाके को बैरिकेडिंग से घेर दिया और भारी पुलिस बल की तैनाती की। हालांकि, कड़े पहरे के बीच शुक्रवार की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई, लेकिन इलाके में तनाव अब भी बरकरार है। प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और कानूनी व ऐतिहासिक पहलुओं की जांच की बात कही जा रही है।
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