Sawan 2026: सावन में जानें हरी चूड़ियों, साड़ियों और मेहंदी के पीछे का धार्मिक व सांस्कृतिक रहस्य

Sawan 2026

Sawan 2026: सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। दुकानों और स्टॉल पर हरी चूड़ियां, हरी साड़ियां और मेहंदी लगवाने के लिए सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। दुकानदार भी ग्राहकों को लुभाने के लिए खास सावन कलेक्शन सजा रहे हैं।

महिलाओं का हरे रंग के प्रति यह खास लगाव केवल फैशन नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक और प्राकृतिक कारण है। सावन का महीना प्रकृति में नई ऊर्जा और हरियाली का संदेश लाता है। बारिश के साथ ही सूखी धरती हरी चादर ओढ़ लेती है, इसीलिए हरे रंग को समृद्धि, खुशहाली, उन्नति और जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

शिव-पार्वती की कृपा और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

धार्मिक शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, भगवान भोलेनाथ का प्रकृति से अटूट संबंध है। उनकी आराधना में बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी हरी-भरी वस्तुएं ही मुख्य रूप से अर्पित की जाती हैं। वहीं, माता पार्वती को सुहाग और सौभाग्य की देवी माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि जो महिलाएं सावन में हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां धारण कर भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार में समृद्धि का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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हरियाली तीज का पावन पर्व और सुहाग का पारंपरिक श्रृंगार

सावन माह में हरियाली तीज जैसे प्रमुख और पवित्र त्योहार मनाए जाते हैं। इस विशेष दिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनकर, हाथों में पिया के नाम की मेहंदी रचाकर और हरी चूड़ियों से सोलह श्रृंगार करती हैं। माना जाता है कि यह रूप और श्रृंगार माता पार्वती को अत्यंत प्रिय है। इस परंपरा का पालन करने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और आपसी मधुरता हमेशा बनी रहती है।

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सुहाग का प्रतीक और खुशहाली की खनक

धार्मिक पहलू के साथ-साथ हरी चूड़ियों का भारतीय संस्कृति में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। भारतीय परंपराओं में चूड़ियों को अखंड सुहाग की निशानी माना गया है। चूड़ियों की मधुर खनक घर के वातावरण में शुभता, सकारात्मकता और आनंद का संचार करती है। इसी वजह से सावन के महीने में महिलाएं नई हरी चूड़ियां पहनकर अपने दांपत्य जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की मंगल कामना करती हैं।

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