बीजेपी का 31 साल पुराना किला ढहाने में प्रशांत किशोर की पत्नी का रहा रोल, जानें कौन हैं डॉ. जाह्नवी दास
Bankipur Bypoll Result 2026: बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना में जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने ऐतिहासिक जीत हासिल कर ली है। 3 अगस्त को आए चुनावी नतीजों में प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी नीरज कुमार को 19 हजार से भी अधिक वोटों के भारी अंतर से शिकस्त देकर 31 वर्षों से अभेद्य माने जाने वाले भाजपा के गढ़ को ध्वस्त कर दिया। इस बड़ी राजनीतिक हलचल के बाद जहां एक तरफ पीके की रणनीति की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ उनकी पर्सनल लाइफ और इस जीत के पीछे छिपे पारिवारिक व सामाजिक समीकरणों को लेकर भी जिज्ञासा बढ़ गई है।
डॉ. जाह्नवी दास: UN की नौकरी से अपोलो इंद्रप्रस्थ में एडवाइजर तक का सफर
प्रशांत किशोर की पत्नी डॉ. जाह्नवी दास पेशे से एक जानी-मानी एमबीबीएस डॉक्टर हैं, जो मूल रूप से असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले प्रशांत किशोर की पत्नी कायस्थ जाति से ताल्लुक रखती हैं। वैसे पूर्वोत्तर भारत (असम) में ‘दास’ सरनेम का इस्तेमाल कायस्थ, कलिता और केवट जैसे कई समुदाय करते हैं। चुनावी हलफनामे और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डॉ. जाह्नवी नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित अपोलो इंद्रप्रस्थ अस्पताल में सीनियर एडवाइजर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
जानिए पीके की लव स्टोरी
प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास की पहली मुलाकात संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के एक समर्थित पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के दौरान हुई थी। उस वक्त दोनों ही यूनाइटेड नेशंस के स्वास्थ्य प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे। शुरुआत में दोनों की बातचीत महज कामकाज और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाओं तक ही सीमित थी। धीरे-धीरे यह पेशेवर संबंध गहरी दोस्ती में बदला और फिर दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। समय के साथ जब दोनों ने जीवन भर साथ रहने का फैसला किया, तो प्रशांत ने अपने परिवार से बात की। दोनों परिवारों की खुशी-खुशी सहमति मिलने के बाद यह अरेंज्ड-लव मैरिज संपन्न हुई।
बेटे दैबिक और परिवार को राजनीति की चकाचौंध से रखते हैं दूर
प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास का एक बेटा है, जिसका नाम दैबिक (Daibik) है। पीके अपनी पत्नी और बेटे को हमेशा लाइमलाइट और मीडिया से दूर रखते हैं। एक इंटरव्यू के दौरान प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया था कि वह जानबूझकर अपने परिवार को सार्वजनिक जीवन में नहीं लाते, ताकि राजनीति की गर्माहट और असर उनके निजी जीवन पर न पड़े। उनका मानना है कि व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के बीच एक स्पष्ट रेखा होना बहुत जरूरी है।

पहली बार 2024 में आईं सामने
सार्वजनिक मंचों से प्रशांत किशोर अक्सर अपनी पत्नी के त्याग और सहयोग की सराहना करते नजर आते हैं। उनका कहना है कि अगर जाह्नवी ने घर और परिवार की पूरी जिम्मेदारी अकेले न संभाली होती, तो वह बिहार के कोने-कोने में जाकर जन सुराज अभियान नहीं चला पाते। 25 अगस्त 2024 को पटना में आयोजित एक महिला सम्मेलन के दौरान प्रशांत किशोर ने पहली बार अपनी पत्नी को जनता के सामने पेश किया था। उन्होंने माना कि बिना किसी शिकायत के परिवार की कमान संभालने वाली उनकी पत्नी का योगदान उनकी राजनीतिक सफलता की रीढ़ है।
बांकीपुर में क्या चला पत्नी की जाति का गोल्डन चार्म
बांकीपुर विधानसभा सीट को बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल और अपर-कास्ट बहुल सीट माना जाता है। इस सीट पर जीत के पीछे राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि स्थानीय मुद्दों के अलावा डॉ. जाह्नवी दास का कायस्थ होना भी एक बड़ा फैक्टर साबित हुआ। बांकीपुर का जातीय ढांचा वर्षों से भाजपा के अनुकूल रहा है, लेकिन प्रशांत किशोर की बहुआयामी रणनीति ने इस तिलस्म को तोड़ दिया।
कायस्थ: लगभग 14% (सबसे बड़ा सामाजिक समूह)
मुस्लिम: लगभग 14%
यादव: लगभग 12%
वैश्य: लगभग 9%
चंद्रवंशी: लगभग 9%
दलित-महादलित: लगभग 8%
भूमिहार: लगभग 8%
ब्राह्मण: लगभग 7%
राजपूत: लगभग 7%
कुर्मी: लगभग 5%
कुशवाहा: लगभग 3%
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BJP के 58% वोट बैंक को दी शिकस्त, 31 साल पुराना इतिहास बदला
हालिया लोकसभा चुनाव तक बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 58 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल हुए थे। लेकिन इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने अपने सघन जनसंपर्क, जमीनी मुद्दों और संतुलित सामाजिक गोलबंदी (विशेषकर कायस्थ वोट बैंक में सेंधमारी) के दम पर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक को पूरी तरह हिलाकर रख दिया और 31 साल बाद बांकीपुर की सियासी तस्वीर बदलकर रख दी।
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