रुक्मिणी-विवाह अटूट श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का जीवंत आदर्श: स्वामी शिवाधर दुबे
Newschuski Digital Desk: पानीपत के विकास नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज ने अपने दिव्य प्रवचन में रुक्मिणी-विवाह के आध्यात्मिक प्रसंग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी-विवाह महज कोई पौराणिक कथा या ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह निष्काम प्रेम, अटूट श्रद्धा और पूर्ण समर्पण की पराकाष्ठा है।
रुक्मिणी जी ने अपनी अनन्य भक्ति और दृढ़ विश्वास की शक्ति से साक्षात भगवान श्रीकृष्ण को प्राप्त किया। यह प्रसंग समाज को सीख देता है कि यदि ईश्वर के चरणों में हमारा विश्वास अडिग हो, तो जीवन का हर संकट और बाधा अपने आप समाप्त हो जाती है।

आध्यात्मिक चेतना और संस्कारों की आवश्यकता
महाराज ने समकालीन परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज को धर्म, सदाचार और नैतिक संस्कारों की सबसे ज्यादा जरूरत है। भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और उसे ईश्वर से जोड़ता है। इससे न केवल व्यक्ति का कल्याण होता है, बल्कि परिवार और पूरे समाज में सुख, शांति और आपसी सद्भाव का माहौल बनता है।

सहयोगियों और श्रद्धालुओं का जताया आभार
कथा की पूर्णाहुति पर महाराज ने आयोजन को भव्य और सफल बनाने के लिए सभी क्षेत्रवासियों, मातृशक्ति, युवाओं और समर्पित सेवादारों का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व वार्ड एमसी रामचंद्र कदयान, माँ-बेटा कीर्तन मंडली परिवार और विकास नगर के निवासियों के विशेष सहयोग व सेवा भाव की सराहना की।
इसे भी पढ़ें: तृण-तृण बिखरती तृणमूल
उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी धार्मिक अनुष्ठान किसी एक व्यक्ति के प्रयास से सफल नहीं होता, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक आस्था और एकजुटता का परिणाम होता है। आप सभी की यही सेवा भावना इस आध्यात्मिक यात्रा की असली ताकत है। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान श्री राधा-कृष्ण की कृपा सभी पर बनी रहे और सबके जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति का वास हो। चलते-चलते महाराज जी ने संदेश दिया कि धर्म और परमार्थ के कार्य में लगाया गया समय और सहयोग ही ईश्वर की कृपा पाने का सबसे उत्तम मार्ग है।
इसे भी पढ़ें: हाइड्रोपोनिक गांजे के साथ मॉडल हर्षा सनी गिरफ्तार
