पेपर लीक रोधी संशोधन कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी, अब 90 दिन में होगा फैसला, दोषियों को 10 साल की

Paper Leak Law

नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए राष्ट्रपति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही देश में पेपर लीक से जुड़ा कानून अब बेहद सख्त और प्रभावी हो गया है। नए संशोधित प्रावधानों के अनुसार, पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े मामलों में अदालती फैसला महज 3 महीने (90 दिन) के भीतर सुनाया जाएगा। इसके साथ ही, इस तरह के अपराधों में शामिल दोषियों के लिए सजा का दायरा बढ़ाते हुए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

शिक्षा मंत्री ने नेटवर्क ध्वस्त करने का जताया संकल्प

यह अहम संशोधन विधेयक संसद में भारी हंगामे के बीच पारित हुआ था। बिल के कानून बनने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा कि लोक परीक्षा संशोधन अधिनियम परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को जड़ से खत्म करने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक के पूरे नेक्सस (नेटवर्क) को ध्वस्त करना है, जिससे देश भर की परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

संशोधन कानून की 5 बड़ी बातें

नए संशोधन के तहत परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई अभूतपूर्व बदलाव किए गए हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट: हर राज्य में पेपर लीक मामलों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा, जहां दैनिक आधार पर सुनवाई करके 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा किया जाएगा।

सजा में भारी बढ़ोतरी: वर्ष 2024 के मूल कानून में जहाँ 3 से 5 साल की सजा का प्रावधान था, वहीं अब इसे बढ़ाकर न्यूनतम 5 साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक कर दिया गया है।

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10 करोड़ तक का भारी जुर्माना: पहले पेपर लीक में लिप्त पाए जाने पर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का नियम था, जिसे अब बढ़ाकर सीधे 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा जांच: अब सामान्य केंद्रीय एजेंसियों के बजाय पेपर लीक से संबंधित आपराधिक मामलों की तफ्तीश के लिए एक समर्पित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया जाएगा।

जांच के लिए निश्चित समय-सीमा: 2024 के पुराने कानून में मामलों की जांच पूरी करने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं थी, लेकिन नए कानून के तहत अब पुलिस/जांच एजेंसी को 2 महीने (60 दिन) के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी।

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