Health Tips: मानसून में बढ़ जाता है फेफड़ों के इंफेक्शन का खतरा, सर्दी-खांसी को न समझें सामान्य

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Health Tips: तेज बारिश और सुहावना मौसम अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है। बरसात के दिनों में सर्दी, खांसी, जुकाम और फेफड़ों से जुड़े संक्रमण (रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस मौसम में तापमान का अचानक बदलना, हवा में अत्यधिक नमी और घरों में आने वाली सीलन की वजह से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) वाले लोगों पर देखने को मिलता है।

क्या कहती है रिसर्च

एक प्रसिद्ध मेडिकल स्टडी (SWORD) के अनुसार, मानसून के महीनों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों में लगभग 13% की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। वहीं, ‘इंडियन जर्नल ऑफ चेस्ट डिजीज एंड अलाइड साइंस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश में लंबे समय तक भीगे रहने या गीले कपड़े पहनने से फेफड़ों में संक्रमण यानी निमोनिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

क्या है निमोनिया और क्यों है खतरनाक

निमोनिया वास्तव में फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें श्वसन तंत्र में सूजन आ जाती है और फेफड़ों के एयर सेक्स (थैलियों) में पानी या मवाद भर जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और सांस लेने में भारी तकलीफ होती है। अगर सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू का समय पर इलाज न किया जाए, तो वह निमोनिया का रूप ले सकता है।

इन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा

अस्थमा (दमा) के मरीज: इनके फेफड़े पहले से संवेदनशील होते हैं, इसलिए जोखिम सबसे ज्यादा होता है।

मधुमेह (डायबिटीज) और हृदय रोगी: कमजोर इम्यूनिटी के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है।

उम्र का असर: 5 साल से छोटे बच्चे और 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग इसकी चपेट में जल्दी आते हैं।

सामान्य सर्दी-जुकाम और निमोनिया में अंतर

लोग अक्सर असमंजस में पड़ जाते हैं कि उन्हें सामान्य फ्लू है या निमोनिया। इसे इस तरह समझें।

साधारण जुकाम: इसमें हल्का बुखार, बहती नाक और सामान्य खांसी होती है जो 3-4 दिनों में ठीक हो जाती है।

निमोनिया के लक्षण: इसमें कपकपी के साथ तेज बुखार आता है, गाढ़ा बलगम आता है, छाती में तेज दर्द होता है और बिना मेहनत किए भी सांस फूलने लगती है। इसके साथ ही शरीर में अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होती है।

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बच्चों में इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

छोटे बच्चे अपनी तकलीफ बोलकर नहीं बता पाते, इसलिए माता-पिता को उनके शरीर में हो रहे इन बदलावों पर तुरंत गौर करना चाहिए।

बहुत तेजी से सांस लेना या सांस लेते समय पसलियों का अंदर की तरफ धंसना।

बच्चे का अचानक बिल्कुल सुस्त हो जाना और लगातार उल्टी होना।

शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) होना और भोजन या दूध पीने से पूरी तरह मना करना।

लगातार तेज बुखार रहना और ऑक्सीजन की कमी के कारण होंठों का रंग हल्का नीला पड़ना।

नोट: बरसात के मौसम में अगर खांसी या सांस की तकलीफ दो से तीन दिनों से ज्यादा बनी रहे, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। स्वयं से एंटीबायोटिक्स लेने से बचें।

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