सीएम योगी का आदेश भी नहीं मान रहे पुलिस अधिकारी, थानाध्यक्ष राजघाट की भूमिका संदिग्ध

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Yogi Adityanath

गोरखपुर: पुलिस महकमे के पास जिम्मेदारी के साथ भ्रष्ट कर्मियों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है। कुछ नाकारा पुलिसकर्मियों की वजह से न सिर्फ महकमे की भद पिट रही है, बल्कि सरकार की भी किरकिरी हो रही है। भ्रष्ट और नाकारा पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अभी हाल में मुख्यमंत्री जनता दर्शन (Janta Darshan of CM Yogi Adityanath) सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस महकमे से जुड़ी आई। बता दें कि गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में से 62 केवल पुलिस विभाग से थीं। इसमें 43 शिकायतें ऐसी रहीं, जिसमें मुकदमे तो दर्ज हो गए हैं, लेकिन विवेचनात्मक कार्रवाई काफी निराशाजनक है। सीएम योगी की नाराजगी को देखते हुए एडीजी ने इन विवेचकों से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही एसएसपी को निर्देशित किया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इसमें सर्वाधिक विवेचना किसके स्तर से लंबित है। उसके विरुद्ध कार्रवाई तय की जाए।

थानाध्यक्ष के पास विवेचना के कई मामले लंबित

मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद एडीजी ने जहां एसएसपी को निर्देश दिया है कि विवेचना लंबित रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें, वहीं थानाध्यक्ष राजघाट विनय सरोज ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि उनके पास ढेरों मामले पड़े। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्हें फुर्सत लगेगी तक वह विवेचना करेंगे। थानाध्यक्ष विनय सरोज से हत्या के एक मामले की विवेचना में देरी को लेकर सवाल किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनके पास विवेचना के कई मामले लंबित पड़े हैं। जब मौका लगेगा तब वह विवेचना करेंगे, इसके लिए वह किसी के बाध्य नहीं है। जबकि कानूनविद के मुताबिक 90 दिन के अंदर विवेचना पूरी कर लिया जाना चाहिए।

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लेकिन विनय सरोज जैसे कुछ थानाध्यक्ष ऐसे हैं जो अपराधियों के दबाव व प्रभाव में आकर कानून को अपने हिसाब से चलाने का प्रयास करते हैं। तभी तो अंबेडकरनगर के अलीगंज थाने से ट्रांसफर होकर आए हत्या के मामले में चार माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन थानाध्यक्ष को गवाही चार्जशीट लगाने की फुर्सत नहीं मिल रही है। जानकारों की मानें तो थानाध्यक्ष विनय सरोज अपराधियों को बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

विनय सरोज पर बनी रहती है अधिकारियों की कृपा

थानाध्यक्ष राजघाट की सबसे अच्छी बात यह है कि इनकी कार्य प्रणाली से फरियादी जहां परेशान नजर आते हैं, वहीं अधिकारियों की कृपा इनपर बनी रहती है। इसी का नतीजा है कि तमाम विवादों के बावजूद भी विनय सरोज को थाना मिलता रहता है। फिलहाल देखना होगा कि विवेचना लंबित रखने के मामले में राजघाट थानाध्यक्ष विनय सरोज पर कार्रवाई होती है या फिर एसएसपी की कृपा बनी रहती है।

सर्किल के सीओ को अब जनता दर्शन में रहना होगा मौजूद

मुख्यमंत्री जनता दर्शन के दौरान अब हर सर्किल के सीओ को भी मौजूद रहना होगा। एडीजी अखिल कुमार ने कई मामलों में देखा गया है कि शिकायत पर कार्रवाई पहले से हो चुकी होती है और अधिकारी को उसकी जानकारी नहीं रहती है। ऐसे में सीओ पहले से शिकायतकर्ता के मामले से अवगत होंगे तथा वह मामले की प्रगति रिपोर्ट को जानेंगे। इससे वह जरूरत पड़ने पर वह मुख्यमंत्री को मामले के प्रगति के बारे में जानकारी दे सकेंगे।

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