बिना हिजाब देशभक्ति गीत गाने पर मशहूर गायिका परस्तू अहमदी को 74 कोड़े मारने की सजा
तेहरान: ईरान में महिलाओं की व्यक्तिगत आज़ादी और अभिव्यक्ति के अधिकारों पर एक बार फिर कड़ा आघात हुआ है। यूट्यूब पर बिना हिजाब के एक देशभक्ति गीत गाने के आरोप में 29 वर्षीय स्वतंत्र ईरानी गायिका परस्तू अहमदी (Parastoo Ahmadi) को 74 कोड़े मारने की दर्दनाक सजा सुनाई गई है। केवल गायिका ही नहीं, बल्कि उनके साथ जुड़े 8 अन्य संगीतकारों और प्रोडक्शन टीम के सदस्यों को भी अदालत ने यही सजा दी है। इसके साथ ही इन सभी पर दो साल तक देश छोड़ने (यात्रा प्रतिबंध) और किसी भी प्रकार की कलात्मक गतिविधि में शामिल होने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
ईरान के कोम (Qom) प्रांत की आपराधिक अदालत ने इस वीडियो को सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन और अश्लील सामग्री का प्रसार करार दिया है। यह मामला दिसंबर 2024 के एक प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसका फैसला जून 2026 में आया है, जो वहां के कलाकारों पर सरकार के कड़े नियंत्रण को साफ दर्शाता है।
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कौन हैं परस्तू अहमदी और क्या है पूरा विवाद
विद्रोह का प्रतीक बनीं गायिका: 21 मार्च 1997 को नोशहर में जन्मी परस्तू अहमदी ने सूरेह अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय से फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की है। वे पारंपरिक और शास्त्रीय संगीत की विशेषज्ञ हैं। साल 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद भड़के महिला, जीवन, आजादी आंदोलन के समर्थन में गाना गाने के बाद वे पहली बार सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर आई थीं।
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विवादास्पद कारवांसेराई कॉन्सर्ट: दिसंबर 2024 में परस्तू ने दयार-ए गचिन कारवांसेराई के एक खाली थिएटर में लाइव प्रस्तुति दी थी। उन्होंने बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में ऐतिहासिक देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवाने वतन’ गाया था। 27 मिनट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसे करीब 29 लाख बार देखा गया।
अदालत का सख्त फैसला और ईरान के कड़े नियम
कोम प्रांत की अदालत ने 18 जून 2026 को इस मामले में प्राथमिक फैसला सुनाया। सजा पाने वालों में परस्तू के अलावा मुख्य संगीतकार अहसान बेराक़दार (Ehsan Beiraqdar), सुहैल फकीह नशीरी (Soheil Faqih Nasiri) और 6 अन्य तकनीकी सदस्य शामिल हैं। इन पर कंप्यूटर क्राइम्स लॉ के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
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ईरान में महिलाओं के लिए कड़े प्रतिबंध
सार्वजनिक स्थानों पर हर महिला के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है।
महिलाओं को पुरुषों या मिश्रित दर्शकों के सामने एकल गायन (Solo Singing) करने की अनुमति नहीं है।
डिजिटल और ऑनलाइन कंटेंट पर भी सरकार की सख्त सेंसरशिप लागू है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया
मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की कार्यकर्ता बहार गांधेहरी का कहना है कि सिर्फ एक गाने के लिए कोड़े मारना यह साबित करता है कि ईरान की जमीनी हकीकत आज भी बेहद क्रूर है। वहीं मानवाधिकार वकीलों का तर्क है कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाने को ‘अश्लीलता’ की श्रेणी में रखना पूरी तरह गलत है और कोड़े मारना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अमानवीय यातना है।
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