मुगल हरम की इश्क बंदिशें और खौफनाक सजाओं की दास्तान, जानें क्यों ताउम्र कुंवारी रहीं ये शहज़ादियाँ
Mughal Haram: मुग़ल सल्तनत की चमक-दमक के पीछे एक ऐसी काली सच्चाई भी छिपी थी, जिसे दरबारी इतिहासकार अपनी किताबों में जगह नहीं देते थे। मुग़ल हरम में कड़े पहरे और सख्त पाबंदियाँ होती थीं। बाबर और हुमायूं के दौर में तो शहज़ादियों का निकाह मुग़ल दरबार के ऊँचे ओहदेदारों के साथ हुआ, लेकिन सम्राट अकबर के समय से यह सिलसिला पूरी तरह थम गया।
इसके पीछे मुख्य सियासी वजह यह थी कि मुग़ल खानदान से जुड़ने वाले दूसरे घराने शाही उत्तराधिकार (तख़्त) के नए दावेदार बनकर समस्याएँ न खड़ी कर दें। शहज़ादियों को असीम धन-दौलत, जागीरें और ऊँचे ख़िताब तो दिए गए, लेकिन उन्हें आजीवन कुंवारा रहने पर मजबूर किया गया।
कड़े पहरों के बीच फूटे प्रेम के अंकुर और आशिकों को मिली मौत
शाही हरम के अनुशासन और बेड़ियों के बावजूद प्यार-मोहब्बत का सिलसिला कभी पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। जब भी किसी शहज़ादी के प्रेम-प्रसंग का भांडा फूटा, उसकी कीमत अक्सर उनके प्रेमियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

जहांआरा बेगम और नज़र ख़ां: शाहजहाँ की सबसे लाडली और शक्तिशाली बेटी जहांआरा बेगम (“पादशाह बेगम”) का प्रेम-प्रसंग एक सुंदर ईरानी अमीर नज़र ख़ां के साथ चर्चा में आया। इसकी खबर लगते ही शाहजहाँ ने नज़र ख़ां को विष देकर मरवा दिया। फ्रांसीसी यात्री फ़्रांस्वा बर्नियर और इतालवी यात्री निकोलाओ मनुच्ची ने अपनी यात्रा वृत्तांतों में इस घटना का ज़िक्र किया है।
रोशनआरा और उनके गुप्त संबंध: औरंगज़ेब की बहन रोशनआरा के कई प्रेम-प्रसंग चर्चित रहे। जब औरंगज़ेब को हरम में गैर-मर्दों की आमद की भनक लगी, तो उसने खुद घेराबंदी कर रोशनआरा को उसके ईरानी प्रेमी के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद उस प्रेमी को मौत की सजा दी गई।
जासूसी, पारिवारिक विवाद और विष का रहस्य
रोशनआरा की हरकतों पर नज़र रखने के लिए औरंगज़ेब ने अपनी बेटी ज़ेबुन्निसा को ज़िम्मेदारी सौंपी थी। जब मामलों का खुलासा हुआ और काज़ी के सामने सुनवाई हुई, तो हनफ़ी कानून के तहत कई दोषियों को मृत्युदंड दिया गया। इस फजीहत के बाद रोशनआरा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, कुछ लोगों ने इसे खुदकुशी का प्रयास माना, जबकि जहांआरा को शक था कि औरंगज़ेब ने खुद अपनी बहन को धीमा ज़हर दिलवाया था।

शायरा ज़ेबुन्निसा को भुगतनी पड़ी ताउम्र क़ैद की सजा
औरंगज़ेब की विद्वान और कवयित्री बेटी ज़ेबुन्निसा (जो “मख़्फ़ी” उपनाम से शायरी करती थीं) भी इस सख्त शासन के शिकंजे से बच न सकीं। उनका नाम लाहौर के सूबेदार अक़ील ख़ां रज़ी के साथ जोड़ा गया। दोनों के बीच शायरी के ज़रिए प्रेम का आदान-प्रदान होता था। जब यह खबर औरंगज़ेब तक पहुँची, तो वह अत्यधिक क्रोधित हुआ और उसने अपनी ही बेटी को लंबे समय के लिए दिल्ली के सलीमगढ़ किले में क़ैद कर दिया।
इसे भी पढ़ें: यौन उत्पीड़न के मामले में बृजभूषण सिंह के बरी होने पर बोलीं विनेश फोगाट
मुगल इतिहास के पन्नों में गुलबदन बेगम, सलीमा सुल्तान बेगम और ज़ीनत-उन-निसा जैसी कई अन्य शहज़ादियों की कहानियाँ भी मिलती हैं, जहाँ प्रेम की कीमत हाथियों से कुचले जाने, ज़हर दिए जाने या देश निकाला दिए जाने के रूप में चुकानी पड़ी।
इसे भी पढ़ें: अखिलेश यादव का AI वीडियो वायरल, साथ दिखे अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी
