हनुमानगढ़ी पर दिए बयान से पलटे बृजभूषण शरण सिंह, मांगी माफी
अयोध्या/गोंडा: अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी को लेकर पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने चार दिन पुराने बयान पर यू-टर्न लेते हुए माफी मांग ली है। इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई और इसका निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था। अब अपने दोनों दावों से पीछे हटते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनका पिछला बयान अधूरा था। उन्होंने नए बयान में कहा कि हनुमानगढ़ी किसी व्यक्ति द्वारा निर्मित नहीं है बल्कि अनादि काल से अस्तित्व में है, और मुस्लिम आक्रांताओं से नागा साधुओं ने इसकी रक्षा की थी।
सीएम योगी के बयान के बाद शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि जिन लोगों ने अतीत में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई थी, वे आज राम मंदिर पर आस्था का ढोंग कर रहे हैं। जब मीडिया ने सीएम योगी के इस दावे पर बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने नमाज पढ़े जाने से साफ इनकार कर दिया था और कहा था कि हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने करवाया था जिसका नाम पत्थर पर दर्ज है। बृजभूषण के इस बयान को लेकर सपा ने सीएम योगी पर हमला तेज कर दिया था।
बृजभूषण शरण सिंह अपने बयान से पलटे, माफी मांगी
BJP नेता ने कहा-
हनुमानगढ़ी के परिसर में नमाज पढ़ी गई…
मुख्यमंत्री जी का बयान भी सही है… किसी को तकलीफ हुई तो माफी मांगता हूं… pic.twitter.com/XcLkhqMyi0
— Romita Tiwari (@romita_tiwari) July 21, 2026
शिराजुद्दौला ने केवल 52 बीघा जमीन दी थी, निर्माण नहीं कराया
विवाद बढ़ता देख मंगलवार को बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा, मेरे मुंह से आधी-अधूरी बात निकल गई थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने पार्वती जी से हनुमानगढ़ी के अस्तित्व की चर्चा की थी, इसलिए यह किसी का बनवाया हुआ नहीं है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि अवध के नवाब शुजाउद्दौला (जिन्हें उन्होंने शिराजुद्दौला कहा) ने मन्नत पूरी होने पर मंदिर को 52 बीघा जमीन दान में दी थी, लेकिन गूगल और कुछ स्रोतों ने इसे मंदिर का निर्माण लिख दिया, जो गलत है।
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मुख्यमंत्री की बात को काटने का सवाल ही नहीं उठता
अपने बयान पर खेद जताते हुए बृजभूषण ने कहा, मुझसे पूछा गया था कि क्या सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई, तो मैंने नहीं कह दिया था। मुझे कहना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि परिसर में नमाज पढ़ी गई थी। मुख्यमंत्री जी ने जो कहा वह पूरी तरह सच है। मेरी भावना सीएम योगी की बात को काटने की बिल्कुल नहीं थी। अगर मैं उस समय पूरी बात कहता तो यह बेवजह का बवाल खड़ा नहीं होता।
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