वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह सुसाइड केस में नया मोड़, महिला और वकील समेत 3 पर एफआईआर दर्ज
Basti News: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक सूर्य प्रकाश सिंह आत्महत्या मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। घटना के सात दिन बाद मृतक अधिकारी के बेटे संदीप सिंह ने बस्ती कोतवाली में एक महिला, उसके पिता और एक वकील के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया है। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि ये तीनों आरोपी लगातार सूर्य प्रकाश सिंह को ब्लैकमेल कर रहे थे और भारी मानसिक तनाव दे रहे थे, जिससे तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
सरकारी आवास में लटका मिला था शव
घटना 29 अगस्त की है, जब आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र स्थित भीलमपुर छपरा के रहने वाले 57 वर्षीय सूर्य प्रकाश सिंह ने बस्ती कचहरी के पास स्थित अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर जान दे दी थी। सिद्धार्थनगर से ट्रांसफर होकर बस्ती आए सूर्य प्रकाश सिंह करीब चार महीने पहले ही वाल्टरगंज के थानाध्यक्ष बनाए गए थे। घटना वाले दिन दोपहर करीब एक बजे वह अपने हमराहियों के साथ शहर पहुंचे थे और उन्हें सिविल लाइंस चौकी पर रोककर खुद आवास चले गए थे। काफी देर तक फोन न उठने पर जब पुलिसकर्मी दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे, तो उनका शव फंदे से लटका मिला।
बेटे ने महिला, उसके पिता और वकील पर दर्ज कराई एफआईआर
मृतक एसओ के बेटे संदीप सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके पिता अप्रैल 2026 से वाल्टरगंज थाने की कमान संभाल रहे थे। गंधार निवासी प्रियंका चौधरी (मूल निवासी वावनपार), उसके पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश मिलकर उनके पिता को लंबे समय से ब्लैकमेल कर रहे थे। इस निरंतर प्रताड़ना और दबाव के कारण ही उनके पिता ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच सब-इंस्पेक्टर जयविंद कुमार यादव को सौंप दी है।
जालौन में भी ब्लैकमेलिंग की शिकार हुए थे इंस्पेक्टर अरुण राय
इस घटना ने एक बार फिर खाकी पर मंडराते ब्लैकमेलिंग के साए को उजागर कर दिया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में जालौन जिले के कुठौंद थाना प्रभारी अरुण कुमार राय ने भी अपने सरकारी आवास में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। उस मामले की तफ्तीश में भी एक महिला सिपाही द्वारा ब्लैकमेल किए जाने की बात सच साबित हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी महिला सिपाही को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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खाकी के ब्लैकमेल होने से उठ रहे गंभीर सवाल
जिम्मेदार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लगातार ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसकर जान गंवाने की घटनाओं से आम जनता और महकमे में गहरे सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिन पुलिस अफसरों पर समाज को अपराध और ब्लैकमेलर्स से सुरक्षा दिलाने की जिम्मेदारी होती है, अगर वे खुद ही ऐसे दबावों के आगे टूटकर जान देने लगेंगे, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा। फिलहाल पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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