योगी की नीति, नीयत और छवि को लील रहे प्रदेश के कुछ खास नौकरशाह

CM Yogi Adityanath Opinion

शाश्वत तिवारी

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में नौकरशाही की मनमानी और लापरवाही का असर योगी आदित्यनाथ की छवि और जनकल्याणकारी योजनाओं पर बहुत गहराई से दिखने लगा है। युवाओं, खासकर बेटियों की सुविधाओं के लिए 2022 में किए गए मुख्यमंत्री के वादे अब 2026 तक पूरे होते भी नहीं दिख रहे। इस कार्य में उत्तर प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग तो सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा। इस विभाग का एक बड़ा हिस्सा स्वयं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से विश्वविद्यालयों के रूप में जुड़ा है, इस कारण राज्यपाल भी इस लालफीताशाही से बेहद नाराज हैं।

उच्च शिक्षा विभाग में केवल लापरवाही ही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार भी चरम पर है। कार्यवाहक निदेशकों और भ्रष्ट तंत्र ने मुख्यमंत्री की छवि का बेड़ा गर्क कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर हालांकि मुख्यमंत्री के अपने ही शहर के रहने वाले एक वरिष्ठ नौकरशाह बैठे हैं लेकिन कहा यह जा रहा है कि मुख्यमंत्री को मंशा भी इस अधिकारी की नजर में कोई मायने नहीं रखती।

विभाग से सूत्र बता रहे हैं कि उच्च शिक्षा विभाग के इस नौकरशाह महेंद्र प्रसाद अग्रवाल पर राज्यपाल की इच्छा और आदेशों भी कोई खास असर नहीं होता। परिणाम यह हो रहा है कि इस विभाग में आए दिन मुकदमों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। शिक्षकों अथवा कर्मचारियों के सामान्य मामले भी यहां से निस्तारित नहीं होने से उन्हें मजबूर होकर न्यायालयों की शरण लेनी पड़ रही है। स्वाभाविक है यह बड़ा आर्थिक बोझ राज्य के कोष पर ही पड़ रहा है। ऐसा प्रकाश में आया है कि अग्रवाल से नाराज राज्यपाल ने अब बहुत कड़ा रुख अपनाया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एक अतिमहत्वाकांक्षी घोषित योजना के रूप में बेटियों को स्कूटी देने में हुई देरी पर उच्च शिक्षा विभाग के मुख्य नौकरशाह एमपी अग्रवाल को जिम्मेदार ठहराया है। राज्यपाल का मानना है कि ये फाइल को केवल इधर से उधर घुमाते हैं।

राज्यपाल के इन तीखे तेवरों के बाद अब प्रदेश की उच्च शिक्षा से जुड़ी नौकरशाही के साथ साथ अन्य विभागों में भी हड़कंप की दशा है। यह अलग बात है कि श्री अग्रवाल अभी भी इस स्थिति को लेकर जरा भी गंभीर नहीं हैं। राज्यपाल के तेवर देख कर ऐसे कई मामलों की जब पड़ताल की गई तो यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि मुख्यमंत्री की इच्छा और घोषणा के बाद भी अनेक योजनाएं ऐसी हैं जिन्हें लेकर नौकरशाही सो रही है। योगी सरकार के प्रोजेक्ट्स की हालत यह है कि वे या तो नौकरशाही की लेटलतीफी या आपसी खींचतान के कारण या तो शुरू नहीं हो पाए या अधर में लटके हैं।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के नए चुनाव के लिए योगी सरकार लगातार अपनी तैयारियों में जुटी है। स्वयं मुख्यमंत्री लगातार हर जिले को लक्ष्य बना कर परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं लेकिन महेंद्र प्रसाद अग्रवाल जैसे नौकरशाह मुख्यमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर खुद पहाड़ बन कर बैठ गए हैं। चुनाव की दृष्टि से यह परियोजना कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के चुनाव में भाजपा को इससे बहुत अधिक लाभ मिला था।

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उत्तर प्रदेश के चुनाव में भाजपा ने 2022 के संकल्प पत्र में मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का वादा किया था। बजट 2025-26 में इसके लिए 400 करोड़ रुपए बजट भी रखा गया। उच्च शिक्षा विभाग की सुप्त नौकरशाही ने एक साल तक योजना की नियमावली ही नहीं बनाई। अब जब बनाई, तो उसमें 90% अंक की अनिवार्य शर्त रख दी। यह ऐसी नियमावली बनी है जिसका लाभ सामान्य छात्राओं को कभी मिल ही नहीं सकता। यह नियमावली राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के सामने पहुंचते ही उनका पारा चढ़ गया। राज्यपाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस नियम से सिर्फ शहरों की उन बेटियों को फायदा होगा, जो प्राइवेट स्कूलों और ट्यूशन में पढ़ती हैं। गांव की बेटियां, जिन्हें 10-12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, वे इस योजना से वंचित रह जाएंगी।

चुनावी घोषणा पत्र के बाद सरकार बन जाने के पांचवे वर्ष में स्कूटी योजना का यह हाल देख कर हर कोई हतप्रभ है। वैसे भी उत्तर प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग अद्भुत है। इस विभाग की कार्यशैली देख कर किसी को भी यहां के रामराज्य पर या तो हंसी आएगी या बहुत चिंता होगी।

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