एनसीईआरटी का बड़ा फैसला, कक्षा 9वीं के छात्रों को पढ़ाया जाएगा आपातकाल का इतिहास

NCERT New Syllabus

Newschuski Digital Desk:देश में साल 1975 में लगाए गए आपातकाल (Emergency) के 50 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने एक बड़ा बदलाव किया है। करीब पांच दशकों के बाद पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के विषय को विस्तार से शामिल किया गया है।

एनसीईआरटी की नई पुस्तक अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड (Understanding Society: India and Beyond) में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आई एक सबसे बड़ी चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया है। एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव का उद्देश्य युवा छात्रों को उन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से अवगत कराना है, जिनके कारण जून 1975 में देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी। नई पाठ्यपुस्तक के मुख्य अंश और इसमें जोड़े गए महत्वपूर्ण अध्याय इस प्रकार हैं।

आपातकाल की पृष्ठभूमि और प्रभाव: किताब में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और तत्कालीन शासन के खिलाफ उपजे जन-असंतोष के कारण देश में राजनीतिक अशांति का माहौल बना, जिसके बाद आंतरिक अशांति के आधार पर आपातकाल लागू किया गया। इसके तहत 21 महीनों तक प्रेस सेंसरशिप रही, विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिए गए।

जयप्रकाश नारायण (जेपी) की भूमिका: पाठ्यपुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के योगदान की विशेष चर्चा की गई है। इसमें दर्शाया गया है कि कैसे उन्होंने बिहार और गुजरात में छात्रों, युवाओं और आम जनता को एकजुट कर लोकतांत्रिक सुधारों के लिए एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया।

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लोकतंत्र की बहाली और आधुनिक चुनौतियां: पुस्तक बताती है कि 1977 में आपातकाल हटने के बाद हुए आम चुनावों ने भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत और मतदाताओं की परिपक्वता को साबित किया। इसके अलावा, किताब में आधुनिक दौर के खतरों जैसे ‘फेक न्यूज’, गलत सूचनाएं (Misinformation), गरीबी, क्षेत्रीय विभाजन, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता पर भी गंभीर विमर्श शामिल किया गया है।

डेमोक्रेसी एंड यू खंड: छात्रों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए पुस्तक में डेमोक्रेसी एंड यू नाम का एक नया सेक्शन जोड़ा गया है, जिसमें मीडिया की भूमिका, मतदान प्रक्रिया, पंचायत व्यवस्था और स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण जैसे जरूरी विषयों को गहराई से समझाया गया है।

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