विश्व भोजपुरी सम्मेलन में वर्चस्व की जंग, प्रदेश अध्यक्ष ने सुधाकर तिवारी की नियुक्ति को बताया अवैध
Deoria News: विश्व भर में भोजपुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित प्रमुख संस्था विश्व भोजपुरी सम्मेलन (विभोस) के भीतर आंतरिक कलह गहरा गई है। संस्था के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान सुधाकर तिवारी नामक व्यक्ति पर संगठन को तोड़ने और फर्जी सूचनाएं फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है।
अवैध और असंवैधानिक है सुधाकर तिवारी की नियुक्ति
डॉ. सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि नीरन जी के निधन के बाद अंतरराष्ट्रीय महासचिव के पद पर सुधाकर तिवारी की कथित नियुक्ति पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा, 13 सितंबर, 2025 को हुई कथित नियुक्ति के दौरान संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष या उपाध्यक्ष में से कोई भी मौजूद नहीं था। उन्हें केवल कागजी कोरम पूरा करने के लिए अस्थायी (तदर्थ) रूप से जोड़ा गया था, लेकिन अब वे निरंकुश होकर मनमाने फैसले ले रहे हैं। 13 अप्रैल, 2026 की बैठक और फेसबुक पर जारी प्रेस नोट का कोई कानूनी औचित्य नहीं है।
प्रेस वार्ता में यह आरोप भी लगाया गया कि सुधाकर तिवारी उन लोगों के साथ मिलकर संगठन में गोलबंदी कर रहे हैं, जिन्होंने जीवन भर संस्था के संस्थापक स्व. अरुणेश नीरन जी के खिलाफ काम किया। डॉ. त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि नेपाल और अन्य राज्यों से लोगों को बुलाया गया, लेकिन देवरिया के स्थानीय पदाधिकारियों को सूचना तक नहीं दी गई।
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संगठन की वर्तमान स्थिति और उपलब्धियां
संस्था की प्रामाणिकता पर जोर देते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में पूर्व वरिष्ठ आईएएस (महाराष्ट्र शासन) सतीश त्रिपाठी संस्था के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। दिल्ली अधिवेशन (6 अप्रैल 2025): नीरन की मौजूदगी में अजीत दुबे को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन में कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
डॉ. त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि संगठन के नियमों की अनदेखी करने वालों और संस्थापकों की विरासत को नुकसान पहुंचाने वालों के विरुद्ध राष्ट्रीय अध्यक्ष जल्द ही सख्त कार्रवाई करेंगे। उन्होंने पदाधिकारियों को ऐसी फर्जी सूचनाओं से सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
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