चार सौ साल पुराना एशिया का सबसे बड़ा लकड़ी का महल, जहाँ पत्थरों की जगह बोलती है नक्काशीदार लकड़ी
Padmanabhapuram Palace: भारत में ऐतिहासिक महलों की कोई कमी नहीं है, लेकिन पश्चिमी घाट की वादियों में बसा एक महल अपनी अनोखी बनावट के कारण दुनिया भर के सैलानियों को हैरान कर देता है। केरल और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित पद्मनाभपुरम पैलेस कोई आम महल नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया और खासकर एशिया महाद्वीप का सबसे विशाल लकड़ी से निर्मित महल परिसर है। लगभग चार सदियों पुराना यह भव्य महल कभी शक्तिशाली त्रावणकोर राजवंश की आन-बान-शान और उनकी प्राचीन राजधानी का मुख्य केंद्र हुआ करता था। इसकी बेजोड़ काष्ठ कला और शाही वैभव आपको एक पल में इतिहास के पन्नों में ले जाते हैं।
इस अद्भुत महल की नींव 17वीं शताब्दी के शुरुआती दौर में रखी गई थी, जिसे बाद में त्रावणकोर के प्रतापी राजा मार्तंड वर्मा ने और भव्य स्वरूप दिया। साल 1795 में जब इस साम्राज्य की राजधानी को बदलकर तिरुवनंतपुरम किया गया, तब तक इसी महल से पूरे राज्य की सत्ता चलती थी। करीब 6.5 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस राजप्रासाद के नक्काशीदार गलियारे, पारंपरिक आँगन और ऊँचे-चौड़े हॉल आज भी सदियों पुराने इतिहास को संजोए हुए बिल्कुल सुरक्षित खड़े हैं।
View this post on Instagram
लकड़ी की वास्तुकला यानी तच्चूशास्त्र का नायाब उदाहरण
इस पैलेस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में पारंपरिक सीमेंट या पत्थरों के बजाय मुख्य रूप से उत्तम दर्जे की लकड़ी, लेटराइट पत्थर और केरल की प्राचीन बढ़ईगीरी (कारपेंट्री) का उपयोग किया गया है। इसे दक्षिण भारत के पारंपरिक तच्चूशास्त्र (लकड़ी की वास्तुकला का विज्ञान) का सर्वश्रेष्ठ जीवित प्रतीक माना जाता है। महल की चार मंजिला केंद्रीय मुख्य इमारत का हर फ्लोर बेहद सुनियोजित है, जिसमें शाही खजाना, राजा का शयनकक्ष, ध्यान केंद्र और राजसी पूजा स्थल बनाए गए हैं।
औषधीय लकड़ियों का पलंग और आपातकालीन सुरंग
महल के कमरों में कदम रखते ही दीवारों पर बनी 17वीं और 18वीं शताब्दी की प्राचीन भित्ति चित्रकारियाँ (म्यूरल्स) अपनी ओर आकर्षित करती हैं, जो पौराणिक गाथाओं को जीवंत करती हैं। यहाँ राजा का एक ऐतिहासिक पलंग मौजूद है, जिसे कई दुर्लभ औषधीय लकड़ियों को मिलाकर तैयार किया गया था। इसके साथ ही परिसर में एक प्राचीन घंटाघर (क्लॉक टावर) भी है, जिसकी सदियों पुरानी घड़ियां आज भी टिक-टिक करती हैं। किसी भी बाहरी हमले या आपातकालीन स्थिति में राजा को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए महल के भीतर एक सीक्रेट सुरंग (गुप्त रास्ता) भी बनाया गया था।
इसे भी पढ़ें: समग्र हिंदुत्व की राह पर भाजपा
सैलानियों के लिए यात्रा गाइड, कब और कैसे जाएं
पद्मनाभपुरम पैलेस तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के अंतर्गत ‘थुकले’ नामक कस्बे के समीप स्थित है। यहाँ आने के लिए सबसे करीबी रेलवे स्टेशन नागरकोइल है, जबकि नजदीकी एयरपोर्ट केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित है। दोनों ही राज्यों से यहाँ के लिए शानदार सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध है। यहाँ घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे मुफीद माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण भारत का मौसम काफी सुहावना रहता है। सुकून से घूमने और बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए सुबह का समय सबसे बेस्ट है।
इसे भी पढ़ें: अर्जुन के गांडीव का घमंड तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने रचा था कजलीवन का अद्भुत स्वांग
