भीषण गर्मी का अलर्ट: 45 डिग्री के टॉर्चर के बीच एक्सपर्ट्स बोले- बच्चों को हीट स्ट्रोक का सबसे ज्यादा खतरा
Nautapa Dates 2026: देशभर में इन दिनों सूरज की तपिश आसमान छू रही है और आधे से ज्यादा भारत भीषण गर्मी के प्रकोप से जूझ रहा है। कई राज्यों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। आम जनता के लिए आने वाले दिन और भी मुश्किल भरे होने वाले हैं, क्योंकि 25 मई से लेकर 2 जून तक नौतपा शुरू हो रहा है, जिसके दौरान धरती और भी ज्यादा तपेगी।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने देशव्यापी एडवाइजरी जारी कर लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी बीच, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक बड़ा अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि इस जानलेवा गर्मी में नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को हीट स्ट्रोक (लू लगना) का सबसे अधिक खतरा है, इसलिए माता-पिता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
नवजात और छोटे बच्चों को क्यों है सबसे ज्यादा खतरा
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अपनी चेतावनी में साफ किया है कि वयस्कों की तुलना में नवजात शिशु और छोटे बच्चे अत्यधिक तापमान के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। गर्मी के मौसम में बच्चों को लेकर की गई जरा सी भी लापरवाही उनकी जान पर भारी पड़ सकती है।
चिकित्सकों के अनुसार, छोटे बच्चों के शरीर का तापमान बड़ों के मुकाबले बहुत तेजी से गर्म होता है। इसके अलावा, बच्चों की शारीरिक प्रणाली पूरी तरह विकसित न होने के कारण वे पसीना भी कम निकाल पाते हैं। पसीना कम निकलने की वजह से उनके शरीर की आंतरिक गर्मी बाहर नहीं आ पाती, जिससे उनके शरीर का तापमान अचानक डेंजर ज़ोन में पहुंच जाता है।
एनएचएम (NHM) के इन 5 बड़े उपायों से बच्चों को रखें सुरक्षित
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही देखभाल और सही समय पर उठाए गए कदमों से बच्चों को इस जानलेवा लू से सुरक्षित रखा जा सकता है। सरकार और डॉक्टरों ने बच्चों को बचाने के लिए ये मुख्य उपाय सुझाए हैं।
घर का माहौल ठंडा रखें: बच्चों को हमेशा ठंडी, छांव वाली और हवादार जगह पर सुलाएं। उन्हें भूलकर भी सीधे धूप में या बंद और गर्म कमरों में न छोड़ें।
हाइड्रेशन है सबसे जरूरी: बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस (ORS), नींबू पानी या अन्य तरल पदार्थ पिलाते रहें। यदि बच्चा बहुत छोटा है, तो मां का दूध समय-समय पर निश्चित अंतराल पर जरूर दें।
कपड़ों का रखें ध्यान: गर्मी में बच्चों को सिंथेटिक या टाइट कपड़े बिल्कुल न पहनाएं। उन्हें हमेशा हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनाएं।
शरीर को ठंडा रखें: बच्चों को नियमित रूप से ठंडे या सामान्य पानी से नहलाएं। यदि नहलाना संभव न हो, तो दिन में दो से तीन बार गीले सूती कपड़े से उनका पूरा शरीर पोछें।
दोपहर की धूप से तौबा: एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच बच्चों को किसी भी हाल में घर से बाहर न निकालें, क्योंकि इस दौरान ‘अल्ट्रावॉयलेट’ किरणें और लू का थपेड़ा सबसे तेज होता है।
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इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
शिशुओं और बहुत छोटे बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि वे बोलकर अपनी तकलीफ नहीं बता सकते। ऐसे में यदि आपका बच्चा नीचे दिए गए लक्षणों में से कुछ भी दिखाता है, तो बिना घरेलू नुस्खों में वक्त गंवाए तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
बच्चे का लगातार चिड़चिड़ा होना या बिना वजह रोना।
सामान्य से बहुत ज्यादा सोना या सुस्त हो जाना।
अचानक तेज बुखार (थर्मामीटर से तापमान नियमित चेक करते रहें)।
उल्टी होना या दूध उलट देना।
सांस लेने में तकलीफ होना या बहुत तेजी से सांस लेना।
त्वचा का एकदम सूखा और लाल हो जाना।
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