जेल से बाहर आई अभिनेत्री का खुलासा, बोलीं- चार महीने में 27 बार किया गया नंगा
Newschuski Digital Desk: फिल्म और डिजिटल जगत की जानी-मानी अभिनेत्री और कंटेंट क्रिएटर संदीपा विर्क इन दिनों अपनी पेशेवर जिंदगी से कहीं ज्यादा अपनी निजी जिंदगी के उन काले पन्नों को लेकर चर्चा में हैं, जिन्होंने उनकी दुनिया बदल दी। करीब 6 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नाम आने के बाद संदीपा को दिल्ली की हाई-प्रोफाइल तिहाड़ जेल में लगभग चार महीने का समय गुजारना पड़ा। अब जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने जेल की चहारदीवारी के पीछे होने वाले अमानवीय व्यवहार और अपमानजनक सुरक्षा प्रक्रियाओं पर से पर्दा उठाया है।
हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान संदीपा ने जो अनुभव साझा किए, वे सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि जेल के अंदर एक महिला के आत्मसम्मान को किस तरह कुचला जाता है।
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अपमानजनक तलाशी प्रक्रिया, 27 बार होना पड़ा नग्न
संदीपा विर्क ने जेल प्रशासन की सुरक्षा जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें अदालत में पेशी के बाद वापस जेल लाया जाता था, तो सुरक्षा जांच के नाम पर उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी। संदीपा के अनुसार, सुरक्षा जांच के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया जाता था।
उन्होंने दावा किया कि 4 महीने के दौरान उन्हें 27 बार इस तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जहां उन्हें पूरी तरह नग्न कर उनकी चेकिंग की गई। अभिनेत्री ने भावुक होते हुए कहा, बाहर के लोग सिर्फ यह देखते हैं कि कोई जेल गया है, लेकिन वहां अंदर क्या सहन करना पड़ता है, यह सिर्फ वही जानता है जो वहां से गुजरा हो।
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प्रेग्नेंसी टेस्ट और सुरक्षाकर्मियों का रूखा व्यवहार
जेल के शुरुआती अनुभवों को साझा करते हुए संदीपा ने बताया कि एंट्री का प्रोसेस ही किसी भी इंसान को भावनात्मक रूप से तोड़ देने के लिए काफी है। संदीपा का आरोप है कि जेल सिस्टम किसी व्यक्ति को दोषी साबित होने से पहले ही अपराधी मान लेता है। उन्होंने बताया कि जेल में प्रवेश के समय होने वाला प्रेग्नेंसी टेस्ट और शरीर के हर हिस्से की कठोर जांच महिलाओं के लिए बेहद शर्मनाक होती है।
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महिला सुरक्षाकर्मियों पर आरोप
संदीपा ने यह भी साझा किया कि वहां तैनात कुछ महिला सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार बेहद रूखा और संवेदनहीन होता है। तलाशी के दौरान किसी भी तरह की गोपनीयता या गरिमा का ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे महिला कैदियों की स्थिति और भी अपमानजनक हो जाती है।
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