राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ऑटो ड्राइवर से चंपत राय का राइट हैंड बनने वाले टिन्नू यादव पर हेराफेरी का आरोप

Ram Mandir Donation Dispute

Ram Mandir Donation Dispute: अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे में करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोपों ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम सामने आया है, जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी और खास सहयोगी माना जाता है।

सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय राजनीति तक, टिन्नू पर मंदिर परिसर के सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे का गलत इस्तेमाल करने के संगीन आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इन दावों की अभी आधिकारिक जांच चल रही है और किसी भी स्तर पर दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

ऑटो ड्राइवर से ट्रस्ट के रसूखदार मैनेजर तक का सफर

एक समय अयोध्या की गलियों में पेट पालने के लिए ऑटो (टेंपो) चलाने वाले राम शंकर यादव का सफर काफी चर्चा में है। अयोध्या के स्वर्गद्वार मोहल्ले के रहने वाले टिन्नू की किस्मत तब बदली, जब वह 1994-95 के दौरान श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आया और उनका ड्राइवर बन गया। इसके बाद कारसेवकपुरम में उसकी एंट्री हुई।

साल 1998 में वह चंपत राय के संपर्क में आया। 2002 में महेश नारायण के निधन के बाद चंपत राय ने उसे संगठन की गाड़ियों की जिम्मेदारी सौंप दी। टिन्नू ने अपनी वफादारी से चंपत राय का भरोसा जीता और साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसे ट्रस्ट में एक वेतनभोगी कार्यकर्ता (सैलरी करीब 16 से 22 हजार रुपये) के रूप में रख लिया गया। कम सैलरी के बावजूद मंदिर परिसर में उसका रसूख किसी बड़े अधिकारी जैसा था।

14 दानपेटियों का कलेक्शन और गंभीर आरोप

कागजों पर मामूली कर्मचारी होने के बावजूद टिन्नू को मंदिर परिसर का आंतरिक प्रबंधन और सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। मंदिर में आने वाले करीब 1 करोड़ रुपये के दैनिक कैश और सोने-चांदी के चढ़ावे को बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने का मुख्य जिम्मा उसी के पास था। ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह और धर्म सेना के संस्थापक संतोष दुबे ने टिन्नू पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

आरोप है कि मंदिर में आने वाले कीमती जेवरों को बिना तौले सिर्फ रफ अनुमान के आधार पर लॉकर में रख दिया जाता था। महिपाल सिंह का दावा है कि जब उन्होंने 2021 में नोटों की गिनती के दौरान कुछ कर्मियों को हेरा-फेरी करते पकड़ा, तो कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही काम से हटा दिया गया। इसके बाद टिन्नू ने कथित तौर पर एक प्राइवेट कर्मचारी के साथ मिलकर 8 महीने पुराने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज डिलीट करवा दिए।

4 साल में करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने का दावा

एक मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 4-5 वर्षों में टिन्नू की संपत्ति में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई है। अयोध्या के नाका क्षेत्र और एयरपोर्ट के पास उसका 14 कमरों का दो मंजिला मकान है, जिसमें हॉस्टल चलता है। निषाद राज चौराहे के पास भी एक बड़ा हॉस्टल है।

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शहर के 6 से ज्यादा नामी रेस्टोरेंट्स में उसकी पार्टनरशिप और बस्ती के विक्रमजोत में करीब 20-22 बीघा कीमती कृषि भूमि खरीदने का आरोप है। इसके अलावा देवरिया और लखनऊ में भी संपत्तियां होने का दावा है। लखनऊ वाले घर पर महंगी गाड़ियां हैं, जबकि रामजन्मभूमि परिसर में भी उसकी 3 गाड़ियां अनुबंध (कॉन्ट्रेक्ट) पर चल रही हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने गठित की SIT

चढ़ावे में विसंगतियों और इस कथित महाघोटाले की गूंज लखनऊ से दिल्ली तक पहुंचने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस एसआईटी को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। फिलहाल, स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर आक्रोश है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी अब तक सीधी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब सभी की नजरें एसआईटी की आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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