भ्रष्ट नौकरशाही ने कराई सीएम योगी की फजीहत, जनता के सवालों का नहीं दे सके जवाब

Lucknow News: सत्ता में लंबे समय तक बने रहने के लिए जनता से जुड़े रहना जरूरी होता है। अब तक का इतिहास भी यही रहा है। जो जनता से कटा, वह अपदस्थ हो गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाल भी इन दिनों कुछ ऐसा ही है। भ्रष्ट नौकरशाही के चलते सीएम योगी का वजूद भी खतरे में नजर आने लगा है। ऐसा ही कुछ बीते दिनों कुशीनगर जिले की तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में देखने को मिला, जब जनता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दुर्व्यवस्था को लेकर सीधे सवाल किया, लोगों ने सरकारी दावे और हकीकत से जब सीएम योगी को अवगत कराया तो उनके चेहरे का भाव देखते ही बन रहा था।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुशीनगर जिले की तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में नारायणी नदी के ओवरफ्लो होने और एपी तटबंध टूटने से प्रभावित गांवों का दौरा करने पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ तमकुहीराज से भाजपा विधायक डॉ. असीम कुमार भी थे। बाढ़ से प्रभावित गौरहा, सिसवा व आसपास के गांव के लोगों ने सीएम योगी को देखते ही समस्याओं को गिनाना शुरू कर दिया। 24 घंटे बिजली देने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री को लोगों ने बताया कि उनके यहां बिजली दस-दस दिनों तक नहीं आती।
लोगों की बात सुनकर मुख्यमंत्री की बोलती बंद हो गई। बस जल्द ही सब सही हो जाएगा, कहकर वहां से चलते बने। उम्मीद की जा रही थी कि हो सकता है लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात की तरह है।
उत्तर प्रदेश को 22 घंटा बिजली देने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुंह पर एक ग्रामीण युवक ने कहा कि– सर 10–10 दिन लाइट नहीं आता है.
युवक की शिकायत पर योगी जी "हाथ हिला" रहे हैं और तमकुहीराज से भाजपा विधायक डॉ. असीम कुमार अपनी "मुंडी"..कुशीनगर जिले की तमकुहीराज… pic.twitter.com/WC07qVGzTq
— Ruby Arun रूबी अरुण (@arunruby08) September 30, 2026
सीएम योगी की कार्यप्रणाली में तानाशाही की झलक
कुशल शासक जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन जिन पर सत्ता का नशा चढ़ जाता है, उन्हें जनता की समस्याएं नजर ही नहीं आतीं। उनको वही सच लगता है, जो प्रशासनिक अधिकारी उन्हें बताते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में भी तानाशाही की झलक साफ दिखती है। क्योंकि भ्रष्टाचार की अब तक जिन लोगों ने पोल खोलने की कोशिश की, प्रशासनिक अधिकारियों ने भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने की बजाय इसे उजागर करने वालों पर कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया। इसके शिकार अधिकतर मीडिया कर्मी हुए हैं। मिड-डे मील योजना, बदहाल स्कूलों की स्थिति दिखाना कई लोगों को भारी पड़ गया, जबकि इसके जिम्मेदार आज भी खुलेआम लूट-खसोट में लगे हैं।
मुख्यमंत्री के सामने झूठे आंकड़े प्रस्तुत करते हैं विभाग
ऐसा नहीं है कि सीएम योगी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन जिनको इसकी जिम्मेदारी दी गई है, वही झूठे आंकड़े प्रस्तुत कर मुख्यमंत्री को खुश करने में लगे हैं। शायद यही वजह है कि सीएम योगी को जमीनी हकीकत नजर नहीं आ रही है। सूत्रों की मानें तो सभी सरकारी विभागों में योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए टीम गठित की गई है और संबंधित विभाग से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराने के लिए टोल फ्री नंबर भी है। जिस पर लोग अपनी शिकायत दर्ज भी कराते हैं, लेकिन भ्रष्ट नौकरशाही के चलते समस्याओं के स्थलीय निराकरण की जगह बिना किसी निवारण के ऑनलाइन समस्या के समाधान हो जाने का दावा करके उसे बंद कर दिया जाता है।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में यही आंकड़े प्रस्तुत कर अधिकारी अपनी और अपने विभाग की तारीफ लूट रहे हैं। जबकि वास्तविकता से इन आंकड़ों का कोई लेना-देना नहीं होता। कुछ विभागीय सूत्रों से यह भी पता चला है कि जल जीवन मिशन सरीखे विभाग मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में जाने से पहले टोल फ्री नंबर पर आई नकारात्मक प्रतिक्रिया को हटवा देते हैं, जिससे अगर सीएम योगी कोई कॉल सुनना भी चाहें तो उन्हें तारीफ वाली ही बात मिले।
सच दबाने में सूचना विभाग का अहम रोल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भ्रष्ट अधिकारियों का सच न पहुंच पाए, इसके लिए कमीशनबाज सूचना विभाग पूरी शिद्दत के साथ लगा हुआ है। चूंकि मीडिया संस्थानों को सरकारी विज्ञापन सूचना विभाग से ही जारी होते हैं। ऐसे में सरकार की नीतियों के खिलाफ व भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरों को प्रकाशित व चलाने वालों का विज्ञापन रोक दिया जाता है। ऐसे में बड़े मीडिया संस्थानों की कलम पर एक तरह से पाबंदी सी लग गई है। शायद यही वजह है कि जो सच मीडिया व अखबारों में आना चाहिए, उसे तरजीह नहीं दी जा रही है। खैर, सोशल मीडिया के दौर में सच और झूठ दोनों अपनी जगह बनाए हुए हैं।
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मुख्यमंत्री को सच जानने का करना होगा प्रयास
योगी आदित्यनाथ से पहले भी उत्तर प्रदेश में कई मुख्यमंत्री हुए हैं और उनके कार्यकाल की आज भी चर्चाएं होती हैं। इनमें अधिकतर ऐसे लोग रहे हैं, जो जनता के बीच जाकर सरकारी नीतियों का लोगों को कितना फायदा मिल रहा है, यह जानने का प्रयास करते रहे हैं। जिलों का दौरा करना इनके कार्यों में शामिल रहा है। भ्रष्ट नौकरशाही उस समय में भी हावी रही है। लेकिन मुख्यमंत्री के जिलों के दौरे से विकास कार्य दिखते थे। भ्रष्टाचारियों का डर रहता था कि कहीं उनकी पोल खुल गई तो कार्रवाई हो सकती है। मगर योगी आदित्यनाथ के शासन काल में विकास कार्यों के अवलोकन करने का दौर खत्म सा हो गया है।
भ्रष्ट नौकरशाही विकास कार्यों के लिए आवंटित धनराशि को लूटने में लगी है। आंकड़ों में जनता को पर्याप्त बिजली दी जा रही है। हर घर नल से स्वच्छ जल पहुंचाया जा रहा है। पात्रों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में ये सब बातें केवल कोरी कल्पना हैं। लोग आज भी मजबूरी और बेबसी में जीने को अभिशप्त हैं।
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