अजय राय की कुर्सी पर मंडराया संकट, इमरान मसूद या राकेश राठौर को मिल सकती है प्रदेश अध्यक्ष की कमान
UP Politics 2027: उत्तर प्रदेश में अपना सियासी वजूद मजबूत करने में जुटी कांग्रेस पार्टी ने एक बेहद चौंकाने वाला संगठनात्मक कदम उठाया है। कांग्रेस आलाकमान ने शुक्रवार शाम को उत्तर प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडेय को उनके पद से हटा दिया है। पार्टी ने उनकी जगह दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को यूपी कांग्रेस की नई जिम्मेदारी सौंपी है। बता दें कि नागपुर के रहने वाले पूर्व राज्यसभा सदस्य अविनाश पांडेय को 23 दिसंबर, 2023 को यूपी का प्रभार दिया गया था, लेकिन इस अचानक हुए बदलाव से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह सामने आ रही है। दरअसल, राजेंद्र पाल गौतम बीते 19 मई को बिना किसी पूर्व समय (अपॉइंटमेंट) के बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया के साथ बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके आवास पहुंच गए थे। हालांकि, मायावती से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी थी। गौरतलब है कि राजेंद्र पाल गौतम दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और सितंबर 2024 में आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे।
अब प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को हटाने की तैयारी
कांग्रेस के भीतर से आ रही खबरों की मानें तो प्रभारी बदलने के बाद अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय की विदाई भी तय मानी जा रही है। साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस अब सूबे में किसी ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) या मुस्लिम चेहरे को संगठन की कमान सौंपने का मन बना चुकी है। हाल ही में यूपी के कांग्रेस सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर सहारनपुर के सांसद व कद्दावर मुस्लिम नेता इमरान मसूद या सीतापुर के ओबीसी सांसद राकेश राठौर में से किसी एक को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की पुरजोर वकालत की है।
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अजय राय को 17 अगस्त 2023 को यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और अगस्त 2026 में उनका 3 साल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अजय राय जमीन पर बेहद सक्रिय नेता रहे हैं और उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि, वे भूमिहार जाति से आते हैं, जिसकी यूपी में संख्या काफी सीमित है और यह पारंपरिक रूप से भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। ऐसे में राहुल गांधी की जातिगत जनगणना और पिछड़ा-मुस्लिम (PDM) कार्ड को यूपी की जमीन पर उतारने के लिए कांग्रेस अब बड़े बदलाव की ओर कदम बढ़ा चुकी है।
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