प्यार ने तोड़ी मजहब की दीवार, थाने में 6 घंटे पंचायत के बाद बनी बात, सानिया ने मंदिर में अमन संग लिए फेरे

Pratapgarh interfaith marriage

Pratapgarh News: रिश्ते जब विश्वास और सम्मान की नींव पर खड़े हों, तो समाज की बड़ी से बड़ी दीवार भी ढह जाती है। इस कहावत को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से आई एक अनूठी प्रेम कहानी ने पूरी तरह सच साबित कर दिया है। यहाँ दाऊदपुर गांव की रहने वाली सानिया बानो और अमन कुमार की मोहब्बत ने आखिरकार उस मुकाम को हासिल कर लिया, जहाँ परिवार की सहमति, पुलिस की समझदारी और दो दिलों की चाहत एक साथ मुस्कुराती नजर आई।

4 साल का प्यार और थाने तक पहुँचा मामला

सानिया और अमन पिछले चार साल से एक-दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे। दोनों की जिंदगी में भूचाल तब आया, जब इस रिश्ते की भनक सानिया के परिवार को लगी। अलग-अलग धर्म (हिंदू-मुस्लिम) होने के कारण दोनों के प्यार पर समाज की नजरें टेढ़ी हो गईं और मामला प्रतापगढ़ के सीधे पट्टी पुलिस थाने तक जा पहुँचा। एक तरफ बेटी अपनी जिद पर अड़ी थी, तो दूसरी तरफ एक बेबस पिता की चिंता और समाज का भारी दबाव था। ऐसा लग रहा था कि यह प्रेम कहानी मुकम्मल होने से पहले ही बिखर जाएगी।

थाने में 6 घंटे तक चली मैराथन पंचायत में बदला माहौल

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीधे पट्टी पुलिस थाने में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया गया। करीब 6 घंटे तक मैराथन पंचायत चली। इस दौरान कई बार माहौल बेहद गर्म हुआ, दोनों तरफ से तीखी बहस भी हुई। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने गजब के धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए बातचीत का सिलसिला टूटने नहीं दिया। घंटों चली इस काउंसलिंग के बाद आखिरकार वो भावुक पल आया, जिसने थाने के तनाव को तालियों की गड़गड़ाहट में बदल दिया।

सानिया के पिता खुर्शीद आलम ने समाज के खोखले डर और बंदिशों को दरकिनार करते हुए अपनी बेटी की खुशी को सर्वोपरि चुना। खुर्शीद आलम ने भारी मन से ही सही, लेकिन साफ शब्दों में इस रिश्ते को अपनी मंजूरी दे दी। जैसे ही पिता की रजामंदी मिली, दोनों परिवारों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। सानिया और अमन ने तुरंत स्थानीय मंदिर का रुख किया और पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ एक-दूसरे को जयमाला पहनाकर सात फेरे लिए।

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भविष्य में किसी भी तरह के कानूनी विवाद या अड़चन से बचने के लिए नवदंपत्ति ने कानूनी तौर पर एक शपथ पत्र (हलफनामा) दाखिल किया। नोटरी के समक्ष दिए बयान में साफ कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से, बिना किसी दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती के जीवनभर साथ रहने का फैसला किया है। यह सिर्फ दो युवाओं की शादी नहीं, बल्कि उस सोच की बड़ी जीत है जहाँ संवाद ने विवाद को हरा दिया। एक पिता ने अपनी बेटी की मुस्कान के लिए रूढ़िवादी बंदिशों को तोड़कर समाज को एक नया संदेश दिया है। आज पूरे प्रतापगढ़ में इस शादी की चर्चा है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि थाने की इस 6 घंटे की पंचायत ने कोई रिश्ता तोड़ा नहीं, बल्कि दो अलग-अलग मजहब के परिवारों को हमेशा-हमेशा के लिए एक अटूट बंधन में जोड़ दिया।

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